10.10.11

जादुई धरातल पर असली मुलाकात, गzेट मैजिशियन शिव कुमार के साथ

आरा मशीन से कटकर दो टुकड़ों में बंट जाते हैं जादुगर शिवकुमार
प्रश्न- शिव कुमार जी, जादू क्या है? इससे किस प्रकार लोगों का स्वस्थ मनोरंजन हो पाता है?
जवाब- जादू विज्ञान पर आधारित एक कला है, और इस कला को खूबसूरती के साथ पेश करना ही मैजिक है। इसमें सामाजिक संदेश छिपे होते हैं। लोगों को अंधविश्वास से लड़ने की प्रेरणा देता है जादू। इसलिए इससे स्वस्थ मनोरंजन भी होता है।
प्रश्न- अगर जादू एक कला है, विज्ञान है तो फिर जो लोग टोने-टोटके करते हैं, झाड़-फूक करते हैं, वो क्या है?
जवाब- यह बिल्कुल गलत और झूठ है कि टोने-टोटकों या झाड़फूंक से किसी को वश में किया जा सकता है। तंत्र-मंत्र जादू-टोना कुछ नहीं होता है। अगर जादू से किसी की जान ली जा सकती या दी जा सकती तो सरकार देश की सीमाओं की रक्षा के लिए एक जादूगर को नियुक्त कर देती और किसी को शहीद होना नहीं पड़ता। ...लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है। जादू से सिर्फ एक स्वस्थ मनोरंजन हो सकता है, ऐसा मनोरंजन जिससे डिप्रेशन का मरीज भी ठीक हो जाता है।
प्रश्न- ...तो जादू के शो के माध्यम से आप किस प्रकार के संदेश समाज को देते हैं?
जवाब- हम अपने शो में लड़की को गायब करते हैं और फिर उसे वापस बुलाते हैं। उसके बाद मैं दर्शकों को कहता हूं कि ‘असली जादूगर तो आप हैं जो लड़की को हमेशा-हमेशा के लिए गायब कर देते हैं।’ फिर मैं उनसे भzुण हत्या रोकने की अपील करता हूं।...हमारे पास मैजिक की एक बोतल होती है जिसके पास एक व्यक्ति जाता है और वह कंकाल मंे बदल जाता है। इसके बाद मैं कहता हूं कि ‘नशा जीवन का नाश करता है। इसे त्याग दीजिए, अन्यथा कंकाल बन जाएगें।’..तो इस तरह के संदेश हम अपने शो में दर्शकों को देते हैं।
प्रश्न- इन सबके बावजूद क्या है कि लोग जादू व सर्कस के शो में बहुत कम पहुंचते हैं?
जवाब- आज जमाना टीवी-फिल्मों पर आधारित हो गया है। जादू व सर्कस के शो में जो कलाकारियां दिखाई जाती हैं आज वे कैमरा ट्रिक्स की सहायता से फिल्मों में दिखाई जाने लगी हैं। बस यही कारण हैै।
प्रश्न- शिव कुमार जी, आपने अपने देश में भी कई शो किए हैं और विदेशों में भी। जादू कला के लिए कहा जाता है कि यह भारत की देन हैं फिर विदेशी जादुगरों ने भारतीय जादुगरों की तुलना में मजबूत पहचान कैसे बना ली है?
जवाब- यह सत्य है कि मैजिक इंडिया की देन है। जहांगीर नामा में भी इसका उल्लेख मिलता है। यह कला विदेशियों ने हमसे सीखी है या चुराई है। आज वो हवा में प्लेन गायब करते हैं, मकान गायब करते हैं, दीवार गायब करते हैं...तो इसमें करोड़ों का खर्चा होता है। विदेशी जादुगरों को उनकी सरकार से सहायता मिल जाती है, इसलिए वो आगे बढ़ रहे हैं। हमारे यहां ऐसी सहायता नहीं मिलती है।
प्रश्न- क्या मनोरंजन पर किसी प्रकार का कोई कर भी लगा हुआ है?
जवाब- कर बिल्कुल लगा है लेकिन हमारे मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत स्वयं जादुगर हैं। इसलिए उन्होंने जादू कला को टैक्स मुक्त कर रखा है। इससे जादुगरों को काफी राहत मिली है।
प्रश्न- शिव कुमार जी, भारत में जादुकला को सही सम्मान किसने दिलाया और कब से इसको उन्नति मिलने लगी?
जवाब- भारतीय जादुगर हुए हैं पी.सी. सरकार, जिन पर भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया है। उन्होंने अमेरिका में एक थियेटर शो के दौरान एक लड़की को दो भागों में बांट दिया, जिससे वहां के सांइटिस्ट एवं अन्य टैकनीशियन काफी प्रभावित हुए। इसके बाद ही भारतीय जादुगरों को सही सम्मान मिलने लगा।
प्रश्न- अब आपसे आखरी सवाल, आपने जादुकला को क्यों अपनाया और यहां तक कैसे पहुंचे?
जवाब- बचपन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी। एक बार देखा कि एक बाबा छाती के Åपर से ट्रक निकाल रहा था। मैनें उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि यह प्राणायाम का खेल है। धीरे-धीरे ऐसे खेलों के प्रति मेरी जिज्ञासा बढ़ने लगी और मेरी मुलाकात अजमेर के जादुगर ‘राय’ से हुई। जादुगर राय ने मुझे पूरी जादुई शिक्षा दी और आज हम देश-विदेश में अपना शो करके लोगों का मनोरंजन करते हैं तथा उनको अंधविश्वास से लड़ने की प्रेरणा देते हैं।