23.8.11

...बचाना है वजूद देश के अमर शहीदों के नारों का

सरकार कर रही कौशिश, दबाने की अन्ना ‘हजारों’ को
अन्ना ने दिला दिया याद दूध छटी का , सत्ता के ‘सरदारों’ को
मेरा मुल्क, मेरा देश, मेरी जान है
लगा जोर ऐडी चोटी का, लाना जनलोकपाल है
है सपना अब तो यही, देश के अन्ना ‘हजारों’ का
...बचाना है वजूद देश के अमर शहीदों के नारों का।

जय हिन्द जय भारत।

अन्ना के समर्थन में सदबुद्धि यज्ञ का आयोजन

अन्ना के समर्थन में सदबुद्धि यज्ञ का आयोजन
आदर्शनगर में हरि बृजेश मशाला उद्योग के सामने हुआ यज्ञ

कोटपूतली। यहां हरि बृजेश मशाला उद्योग के समीप क्षेत्रवासियों एवं स्थानीय दुकानदारों ने जनलोकपाल की मांग को लेकर दिल्ली में आठ दिन से चल रहे महाआंदोलन एवं अनशन पर सरकार के अनदेखी रैवये व हठधर्मिता को तोड़ने के लिए  ‘सदबुद्धि’ यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें सभी दुकानदारों ने आहुतियां दी एवं प्रार्थनाऐं की, कि ’जल्दी ही जनलोकपाल पारित करने के लिए सरकार एवं सांसदों को सदबुद्धि दे।
    इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने ‘अन्ना तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं, ‘ गांव गांव ये हवा चली है, ईमानदारी की ज्योत जली है, ‘ अब तो ये स्पष्ट है जो, जो हमारे साथ नहीं वो भष्ट है, जैसे नारे भी लगाये गये।
    यज्ञ में जन कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा, अनिल जांगिड़, बृजेश कुमार सैनी, सुमन कुमावत, श्यामलाल चौधरी, गोपीनाथ शर्मा, भगत चायवाला, संजय जांगिड़, रमेश यादव, कृष्ण सैनी, ’ सहित अनेक दुकानदार व निवासी उपस्थित थे।

21.8.11

अपने विचार हमें newschakra@gmail.com पर भेजें.

अन्ना हजारे का अनशन छठे दिन भी जारी है. टीम अन्‍ना और सरकार, दोनों ओर से वार्ता की जरूरत बताई जा रही है. पर अब तक ठोस पहल नहीं की गई है.
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जनमत संग्रह करा लिया जाए- भूषण

भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे अन्ना हजारे की ओर से शनिवार को सरकार को यह चुनौती दी गई कि देश की जनता को जन लोकपाल विधेयक और सरकार के लोकपाल विधेयक में से कौनसा प्रारूप पसंद हैए इसे जानने के लिए देश में जनमत संग्रह करा लिया जाए।
         रामलीला मैदान पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए अन्ना टीम के वरिष्ठ सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार और कुछ पक्षों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि जन लोकपाल विधेयक को थोपने की कोशिश की जा रही है तथा सरकार को ब्लैकमेल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आरोप लगाया जा रहा है कि अन्ना ने अपनी बात थोपने के लिए सरकार के सिर पर बंदूक तान रखी है। उन्होंने कहा कि अन्ना के पास कोई बंदूक नहीं है और न ही सरकारी ताकत। जन समर्थन को आंकने के लिए देश में इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराया जा सकता है।

5.8.11

कहां है परिवहन विभाग ?


इन जीपों की तस्वीरे कोटपूतली-बानसूर रोड़ से ली गई है।
स्कूली जीप की तस्वीर बानसूर के एक प्राइवेट विघालय की है।  

परिवहन विभाग की नींद ने छीना आमजन का सुख चैन
    चलना है तो जीप की छत पर बैठ जा या पीछे लटक जा...नहीं तो यूं ही पूरे दिन खड़ा रहेगा। जीप चालकों की यही धोंस अच्छे भले व पढ़े-लिखे आदमी को भी ‘लटकने’ पर मजबूर कर देती है।...और फिर मरता, क्या नहीं करता, कहावत यहीं तो चरितार्थ होती है। बेचारा व्यवस्था का शिकार आदमी करे भी क्या!
    जी हां, परिवहन विभाग की अनदेखी की वजह से गzामीण लोगों को प्रतिदिन जान हथेली पर रख सफर करना पड़ रहा है जिसमें बच्चे, महिलाऐं एवं वृ¼जन भी शामिल हैं।
    Åपर की तस्वीरों को ध्यान से देखिए, एक जीप जिसमें जीप चालक बुकिंग के समय 10 से  अधिक सवारियां नहीं बिठाते वहीं सवारियों के लिए चलते समय ये 30 सवारियां पूरी हुए बिना स्टैण्ड से हिलते भी नहीं हैं।। तस्वीर 1 में एम-1 व्यक्ति को देखिए,  यह व्यक्ति जीप के सबसे आगे के हिस्से पर बैठा है और ऐसी स्थिति में है कि अचानक बzेक लगने पर यह पलक झपकने से भी कम समय में सड़क पर गिर सकता है और दुर्घटना घट सकती है। अब तस्वीर 2 में एम-2 को देखिए, यहां इस छात्र ने जीप के पर्दे को पकड़ रखा है और वह भी एक हाथ से, दूसरे हाथ से इसने अपने बैग को संभाल रखा है। बzेकर या गड~डों से गुजरने के दौरान कभी भी हाथ पर्दे से फिसल सकता है और बस पहुंच गए अस्पताल।
    अब तस्वीर 3 देखिए, यह आपको ज्यादा विचलित कर सकती है। इस जीप में सभी स्कूल छात्र हैं। बानसूर के एक प्राइवेट विद्यालय ने स्कूली बच्चों को यही ‘वाहन सुविधा’ प्रदान कर रखी है। यहां हो सकता है बच्चों के अभिभावकों को इस बात की तसल्ली हो कि स्कूल की गाड़ी बच्चों को घर से लाती व ले जाती हैं, लेकिन इस तस्वीर को देखकर अभिभावक सावधान हो जांए। ध्यान से देखिए इस जीप में तीन स्कूली बच्चे जीप में पीछे पायदान पर आधे-अधूरे लटक रहे हैं। इनमें से एम-3 ;छात्रद्ध तो अपना घुटना मोड़कर हवा में झूल रहा है।...और अब तस्वीर 4 तो आपने देख ही ली होगी। इस तस्वीर में यह छात्र पायदान पर उल्टे मुंह खड़ा है जो कभी भी चलती जीप से गिर सकता है। यह फोटो यह बताती है कि ये स्कूली जीप के ड्राइवर बच्चों का कितना ख्याल रखते हैं।...और आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए अधिकतर स्कूलों में स्कूल वाहन उनके संस्था प्रधान ही चलाते हैं।
    ...तो अब आप ही निर्णय कीजिए कि यह परिवहन विभाग की अनदेखी है या मनमानी छूट, जो जिंदगी से खेल रही है। न्यूज चक्र की प्रशासन से अपेक्षा है कि परिवहन को इसके लिए शीघz पाबंद करें और अभिभावकों से निवेदन है कि स्कूलों में बच्चों की फीस जमा कराकर ही अपने दायित्व की इतिश्री ना समझें, घर से निकलें और घर से स्कूल तक की खबर भी रखना शुरू करें, अन्यथा फिर क्या जब चिड़िया चुग जाए खेत।