24.9.11

किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते


 किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते
... कहते हैं हाथों की लकीरों पर भरोसा मत कर, किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते। जी हां, इस कथनी को करनी में बदल दिया है राजस्थान की कोटपूतली तहसील के नारेहड़ा गांव की 14 वर्षीय मुखला सैनी ने। मुखला को कुदरत ने जन्म से ही हाथ नहीं दिये, लेकिन मुखला का हौसला, जज्बा और हिम्मत देखिए, उसने करत-करत अभ्यास के जड़मत होत सुजानकहावत को भी चरितार्थ कर दिखाया है, अब वह अपने पैरों की सहायता से वह सब कार्य करती है जो उसकी उमz के अन्य सामान्य बच्चे करते हैं।
कुदरत ने मुखला को सब कुछ तो दिया, लेकिन जीवन के जरूरी काम-काज के लिए दो हाथ नहीं दिये। बिना हाथों के जीवन की कल्पना करना भी बहुत कठिन है, लेकिन मुखला ने इसे अपनी नियति मान कर परिस्थितियों से समझौता कर लिया है। हाथ नहीं होने पर अब वह पैरों से अपने सारे काम करने लग गई है। पढ़ने की ललक के चलते मुखला पैरों से लिखना सीख गई है और आठवीं कक्षा में पहुंच गई है। मुखला को पैरों से लिखते देखकर हाथ वालों को भी कुछ कर दिखाने की प्रेरणा लेनी चाहिए।14 वर्षीया मुखला एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की है। उसके माता-पिता मजदूरी कर जीवन-यापन करते हैं। ईश्वर ने जब मुखला के शरीर की रचना की होगी, तो शायद दोनों कंधों के आगे उसके हाथ बनाना भूल गया होगा। उपर वाले की इसी भूल को मुखला को अब जीवन भर भुगतना है।
बहरहाल, बड़ी होने पर मुखला गांव के अन्य बच्चों के साथ स्कूल जाने लगी। दूसरे बच्चों को हाथ से लिखते देखकर उसने हिम्मत नहीं हारी और पैरों से लिखने का प्रयास करने लगी। अपनी लगन और परिश्रम से मुखला ठीक तरह से लिखना सीख गई है। इतना ही नहीं वह पैरांे से ही खाना खाती है। खाना खाने के लिए उसे पैरों से ही रोटी का कोर तोड़ना होता है और फिर उसे सब्जी में डुबोकर मुंह तक पहुंचाना, सचमुच आप और हमारे लिए यह किसी कौतुहल से कम नहीं, लेकिन मुखला के लिए यह सिर्फ रोजमर्रा का एक काम है जिसे करना हैसे ज्यादा कुछ नहीं।...आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि मुखला के हाथ नहीं होते हुए भी उसमें स्वावलम्बन व जिम्मेदारी का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। मुखला की मां बताती है कि मुखला अपने नहाने की बाल्टी भी पास के हैंडपंप से खुद भरकर, पकड़कर लाती है। घर में झाडू और पोंचा तक लगा लेती है।...लेकिन अब बेबस है तो सिर्फ सरकार के आगे...मुखला के परिवार एवं गुरूजनों का कहना है कि आम आदमी को जिंदगी जीना सीखातीइस नन्ही बालिका को अब तक किसी प्रकार की कोई सरकारी सहायता या हौसलाअफजाई नहीं मिल पाई है। आठवीं में आते-आते अब मुखला के परिवारजनों को भी चिंता सताने लगी है कि संसाधनों के अभाव में वे मुखला को आगे कैसे पढ़ा पाएगें जबकि मुखला पढ़ने में बहुत होशियार है और वह आगे पढ़ना चाहती है।
कीचड़ भरा रास्ता पार करके पैदल जाती है मुखला स्कूल
मुखला की ढ़ाणी के रास्ते में भरा कीचड़ व फिसलन भी उसके हौसले को फिसला नहीं पाये हैं। वह रोजाना यह सब बड़ी ढृढ़ता से पार करते हुए पैदल ही अपने विद्यालय विवेकानंद सी. सैकण्डरी स्कूलजाती है। इस बात की पुष्टि मुखला की स्कूल के प्रिंसिपल रतल लाल भी करते हैं कि मुखला को अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिल रही है, लेकिन यहां स्कूल में मुखला को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है। मुखला इस स्कूल में बचपन से पढ़ रही है और उसने सब कुछ यहीं सीखा है।

हवा में उड़ी लड़की, आरा मशीन से कटकर दो टुकड़ों में बंटे मैजिशियन शिवकुमार



मैजिशियन शिव कुमार के मैजिक के मैजिकजाल में दर्शक
हवा में उड़ी लड़की, आरा मशीन से कटकर दो टुकड़ों में बंटे मैजिशियन शिवकुमार
कोटपूतली। जी हां, कुछ इसी तरह के हैरतअंगेज कर देने वाले मैजिक कर दर्शकों में कौतुहल व जिज्ञासा के भाव पैदा कर रहे हैं मैजिशियन शिवकुमार। शाम 7 बजे शुभारंभ हुए कोटपूतली में प्रथम शो का शुभारंभ कोटपूतली विधायक रामस्वरूप कसाना के बेटे आदित्य कसाना ने रिबन काटकर किया। इस अवसर पर आदित्य के साथ रोहित, आनंद, गोबिन्द बिदानी, पार्षद शैतान सिंह एवं अन्य अतिथि उपस्थित थे।
    शो के दौरान गzेट मैजिशियन ‘जादूगर’ शिवकुमार ने भzुण हत्या एवं जल है तो कल है जैसे महत्वपूर्ण संदेशों को भी शो के जरिये रेखांकित किया। साथ ही पलक झपकते ही मैजिक बाWक्स से बाहर निकलकर दर्शकों के बीच पहुंच जाना और पलक झपकते ही सांप को लड़की में और लड़की को खुंखार जानवर में बदलने का कारनामा भी जादुगर शिवकुमार ने करके दिखाया।
    जादुगर शिव कुमार के पीआरओ मनीष तिवारी ने बताया कि कोटपूतली में प्रतिदिन दो शो प्रदर्शित होंगे। पहला शो दोपहर 12 बजे से एवं दूसरा शाम 7 बजे से प्रांरभ होगा। तिवारी ने बताया कि उनका कोटपूतली शहर में यह दूसरी बार शो है इससे पहले वे 1 साल पहले यहां आए थे तब दर्शकों ने उनको काफी पंसद किया था, और अब वे एकदम नये जादू के कारनामे लेकर आये हैं जो दर्शकों को काफी पसंद आएगें।

7.9.11

इंस्पायर्ड छात्रवृत्ति के लिए चयनित

मां सरस्वती सी.सैकण्डरी स्कूल, सैमाला का छात्र
इंस्पायर्ड छात्रवृत्ति के लिए चयनित

छात्र को मिलेगें 4 लाख रूपये
कोटपूतली। जी हां, सही पढ़ा आपने। इस छात्र को मिलेगी 4 लाख की छात्रवृत्ति। ...और छात्रवृति देगा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार।...तो देखिए सरकार होनहारों को कितना कुछ देती है। इस छात्र ने विज्ञान वर्ग में उत्कृष्ठ अंक प्राप्त किए हैं, जिसके फलस्वरूप उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारत सरकार ने 80,000 रूपये प्रतिवर्ष, अगले 5 वर्ष तक देने की घोषणा की है। इस प्रकार छात्र को कुल 4 लाख रूपये मिलेेगें। ...और यह होनहार तैयार किया है क्षेत्र में सैमाला खुर्दी रोड़ पर स्थित मां सरस्वती पब्लिक सीनियर सैकण्डरी स्कूल ने।
    संस्था के निदेशक रामावतार कसाना ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि समस्त स्टाWफ व छात्रों में छात्र की उपलब्धि पर गर्व है। छात्र ने उपलब्धि का श्रेय गुरूजनों के आशिर्वाद एवं मार्गदर्शन को दिया है।
    उल्लेखनीय है कि विद्यालय क्षेत्र में कड़े अनुशासन एवं शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इससे पहले विद्यालय के एक अन्य छात्र ने मेरिट में भी स्थान पाया था।

कब चालू होगा 75 लाख का ट्रोमा सेंटर?

कब चालू होगा 75 लाख का ट्रोमा सेंटर?
तैयार है 55 लाख का भवन व 20 लाख की एंबुलेंस   
कोटपूतली। सरकारी मशीनरी किस गति से कार्य करती है, देख लीजिए कोटपूतली के ट्रोमा सेंटर भवन एवं इसके बाहर सभी सुविधाओं से लदकद खड़ी एम्बुलेंस को।
    इस भवन को पूर्णतया तैयार हुए करीब 8 माह से भी अधिक का समय बीत चुका है। अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि खुद अस्पताल प्रशासन भी इसकी अवधि ‘करीब’ या ‘लगभग’ शब्दों में ही बताता है।
    अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस भवन में बिजली, पानी, चैम्बर, ऐसी...अर्थात सभी मूलभूत व आवश्यक सुविधाऐं मुहैया करा दी गई हैं। अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भवन निर्माण में कुल 55 लाख का खर्चा बैठ गया है। इसके अलावा इसके बजट में 20 लाख की अलग से एम्बुलेंस भी शामिल है जो सेंटर के बाहर ही खड़ी रहती है। इसके संबंध में खुद अस्पताल प्रशासन के लोग व अन्य दबी जबान से कहते हैं कि अगर शीघz भवन का उद~घाटन नहीं हुआ तो यह एंबुलेंस फिटनेस के लिए मैकेनिक के पास और भवन की मरम्मत के लिए दोबारा से बजट पास करना पड़ सकता है।...क्योंकि लोगों ने भवन के बाहर गाड़ियां खड़ी करना और इसके अहाते में बैठना व सोना शुरू कर दिया है। कुछ लोग आंख बचाकर भवन को गंदा भी करने लगे हैं।
गुड़गांव से जयपुर के बीच इकलौता सरकारी ट्रोमा सेंटर
        गुडगांव से जयपुर के बीच बीडीएम अस्पताल ही एकमात्र ऐसी सरकारी अस्पताल है जिसमें सभी आवश्यक सुविधाऐं मौजूद हैं। यहां ब्लड बैंक की सुविधा भी मौजूद है। नेशनल हाइवे के दुर्घटनागzस्त मरीजों को यहीं पर रैफर कर लाया जाता है। लेकिन अक्सर घायलों की हालात गंभीर होने एवं यहां ट्रोमा सेंटर अभी चालू ना होने के कारण मरीजों को जयपुर रैफर किया जाता है। लेकिन कई बार मरीज जयपुर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।