24.6.11

जिंदा जला दिया जालिमों ने

 जिंदा जला दिया जालिमों ने
शाहपुरा। मामला शाहपुरा तहसील के बागावास चौरासी गांव का है, जहां दहेज के लिए एक विवाहिता को वर्षों तक प्रताड़ित किया जाता रहा और अंत में कोई बात ना बनती देख ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे गत 8 जून को आग के हवाले कर जिंदा जला दिया। आग से बुरी तरह झुलसी विवाहिता ने जयपुर के एसएमएस अस्पताल में पुलिस को पर्चा बयान देकर दम तोड़ दिया।...और अब परिजन न्याय के लिए भटक रहे हैं। परिजनों ने एएसपी विनीत बंसल को एक ज्ञापन सौंपकर आरोपियों को शीघ गिरफ्तार करने की मांग की है।
        उल्लेखनीय है कि इस गांव में यह पहली घटना नहीं है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यहां पहले भी दहेज के लोभी विवाहिताओं को यातनाऐं देते रहे हंै, लेकिन उन पर कोई कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने के कारण यहां दहेज लोभियों के हौसलें बुलंद है। जिसके परिणामस्वरूप ही पूतली निवासी पूजा कुम्हार ‘दहेज’ की भेंट चढ़ी।
पुलिस को क्या बताया पूजा ने दम तोड़ने से पहले-
    विवाहिता पूजा देवी ने पुलिस को बताया कि मेरी शादी शाहपुरा तहसील के बागावास चौरासी में लीलाराम कुम्हार के साथ आठ साल पहले हुई थी। मेरे एक लड़का व एक लड़की है। ससुराल पक्ष के लोग आए दिन मुझे दहेज की खातिर परेशान करते आ रहे हैं। आठ जून को मेरे पति लीलाराम, सास गैंदी व ससुर कगाराम ने मेरे से झगड़ा किया। बाद में मेरे Åपर मेरे पति ने केरोसीन डाल दिया और आग लगा दी। इस घटना से पूर्व मैंने मेरे पिता रोहिताश को झगड़े की इतला दे दी थी। घटना के दौरान शोर शराबा सुनकर आसपास के लोग आए और मेरे घर वालों को इस बारे में बताया। जिस पर मुझे जयपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
    पूजा के पर्चा बयान के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने अपराधियों को शीघz पकड़ने का आश्वासन दिया है। दूसरी और विवाहिता के पीहर पक्ष ने प्रशासन से अपील की है कि ‘अपराधियों को शीघz गिरफ्तार कर उन्हें कड़ी-से-कड़ी सजा दिलवाये ताकि दहेज लोभियों को ऐसा घृणतम कृत्य करते हुए ‘कानून’ का भय हो। इस गांव में पहले भी विवाहिताओं के साथ जुल्म होते रहे हैं लेकिन या तो मामला प्रशासन तक पहुंच नहीं पाता और अगर पहंुचा भी है तो उस पर कोई ठोस कार्रवाही नहीं हुई।
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भिवाणी निवासी निकेश की न्यूज चक्र में प्रकाशित कविता ‘भष्टाचार’

भष्टाचार
बेरहम बुझदिलों पर सवार होता है भष्टाचार
बड़ो बड़ों का इमान लुटाता है भष्टाचार
कभी खाकी का दीवाना बन जाता है भष्टाचार
तो कभी काले कोट को अपना निशाना बनाता है भष्टाचार
सीबीआई पर भी बादलों की तरह छा गया है भष्टाचार
देश का पैसा विदेशों में जमा कराता है भष्टाचार
नेताओं के दिल में भूत बनकर बैठा है भष्टाचार
इन्हीं के इशारों पर खून चूस रहा है प्रशानिक भष्टाचार
निकेश सच्चाई तो यह है गमों का रास्ता दिखाता है भष्टाचार
बड़े बड़े को जेल में खड़ा करके रोटी दिलाता है भष्टाचार

निकेश, भिवाणी

सामान्य ज्ञान, नौकरी भर्ती, प्रश्न- उत्तर

 

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19.6.11

पति -पत्नि की धारदार हथियार से गला काट कर निर्मम हत्या

कोटपूतली -यहां से आठ किलेामीटर दूर गांव करवास मे विगत रात्रि को सो रहे पति -पत्नि की धारदार हथियार से गला काट कर निर्मम हत्या कर दी।  जिससे करवास गंाव सहित आस पास के गांवो मे सनसनी फैल गयी है। घटना स्थल पर पहुंचे जयपुर जिला देहात के पुलिस अधीक्षक सवाई सिंह को यहां के सभी नेता एवं गांव के पंच पटेलां ने 10 रोज के अन्दर इस निर्मम हत्याकाण्ड का पर्दाफा’ा करने की चेतावनी दी है। इसमं कांगेस के नेता राजेन्द सिंह यादव, जद यू के नेता रामनिवास यादव, जनकल्याण समिति अध्यक्ष अ’ाोक शर्मा, समाजसेवी देवेन्दz दलाल एवं भाजपा नेता कुलदीप धनकड हैं।
    अति0 पुलिस अधीक्षक विनित बंसल के अनुसार विगत रात्रि करवास गांव मंे पप्पू सिंह जाट (45) पुत्र फुलसिंह जाट एवं उसकी पत्नि राजबाला (40) की उनके घर मंे ही धारदार हथियार से गला काट कर हत्या कर दी। सूचना मिलने पर घटना स्थल पर जयपुर से डाWग स्काइड ;खोजी कुत्तेद्ध एवं फिंगर प्रिन्ट वि’ोषज्ञांे को बुलाया गया बाद मंे मृतकांे को पोस्टमार्टम कराकर एफएसएल नमूने लिये गये हैं। इस प्रकिzया मंे दोहपर के तीन बज गये। मृतक राजबाला की गर्दन पर पीछे से वार किया गया एवं मृतक पप्पूराम की गर्दन पर आगे से वार किया गया वार इतना जोरदार था कि एक ही झटके से दोनांे की गर्दन कट गयी रात की घटना का सुबह मालूम पडा।
    मृतक राजबाला अपने घर मंे अन्दर सो रही थी एवं मृतक पप्पू घर के चौक मे सो रहा था। जब यह घटना घटी तो घर मंे मृतक पप्पूसिंह की बडी बेटी रजनी 17 वर्ष, भावना 15 वर्ष एवं बबीता 13 वर्ष के अलावा एक लडका बिल्लु 11 वर्ष घर मंे थे एवं बडा लडका जो द्वितिय वर्ष मंे कोटपूतली पढता है वह घटना के समय घर पर नहीं था। जितेन्दz कोटपूतली मंे किराये पर रहता था। मृतक पप्पूसिंह एवं उसका भाई रोहिता’ा दिल्ली मंे पल्लदारांे की ठेकेदारी करते थे। एवं हाल मंे उसके साले की शादी कराने के बाद उसके ससुराल वालांे से खींचातानी चल रही थी।
    मिली जानकारी के अनुसार मृतक पप्पूसिंह के साले की पत्नि ससुराल मंे नहीं रहना चाहती थी एवं हाल मंे ही उसके पेट मंे जो बच्चा पल रहा था उसको  गर्भपात करके गिरा दिया था। पुलिस अधीक्षक सवाई सिंह ने बताया कि पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है एवं शीघ ही इस हत्याकांड का पर्दाफा’ा

कर दिया जायेगा। आज घटनास्थल पर उपपुलिस अधीक्षक आलोक सिंघल, एएसआई सुरेन्दz सैनी सहित पुलिस फोर्स मौजूद थी।
    मृतक पप्पूसिंह की लडकी भावना बता रही थी कि रात्रि तीन बजे मेरे पिता का फोन बज रहा था जबकि पोस्टमार्टम की रिर्पोट के अनुसार पप्पू की हत्या 18 घण्टे पहले रात्रि 10 बजे हो गई थी। पुलिस ने मृतक पप्पूसिंह के फोन को भी जब्त कर लिया है। जिससे भी हत्या होने का पर्दाफा’ा हो  सकता है। आज इस निर्मम हत्याकांड को लेकर पूरे करवास गांव मंे किसी के घर मंे भी चुल्हा नहीं जला एवं मृतक पप्पूसिंह व उसकी धर्मपत्नि राजबाला को चिता पर एक साथ जलते देख वहां मौजूद सैकडांे गांववासियांे की आंखे नम हो गई।
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4.6.11

क्यों झुलसा रामप्रसाद हादसा या साजिश

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राजस्थान में फिर बनाएगी कांगzेस सरकार

2.6.11

बार-बार के आंदोलन लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छे नहीं

    पिछले एक साल के घोटालों से ना केवल जनता की समस्याओं व आक्रोश का गाफ बढ़ा है बल्कि अंतर्राष्टीय स्तर पर भी देश की छवि खराब हुई है। समस्याओं से पीड़ित लोगों के बीच के एक आदमी को जनता यह सोच कर चुन लेती है कि यह भुक्त भोगी है, हमारे ही बीच का है इसलिए यह हमारी समस्याओं का ठीक से समाधान करा पाएगा। लेकिन वही आम आदमी चुनाव जीतते ही खास हो जाता है और देखते ही देखते करोड़ों में खेलने लगता है। और जब कभी एक मंच पर किसी एक पार्टी के नेता द्वारा किसी दूसरी पार्टी के नेता पर उंगली उठाई जाती है तो स्पष्टीकरण के रूप में कहा जाता है कि हमारे नेता का तो बहुत छोटा घोटाला है तुम्हारी पार्टी के नेता ने तो इतना बड़ा घोटाला किया था। इस तरह से बेशक वो एक दूसरे का मूंह बंद करने की कोशिश करते हों लेकिन जनता तो दोनों की ही कारस्तानी देख चुकी होती है और जान जाती है कि एक नागनाथ है तो दूसरा सांपनाथ।
इस तरह राजनेताओं पर से उठते विश्वास के कारण ही आंदोलनों का जन्म हो रहा है। ताजा घटनाकम में पहले अन्ना हजारे और अब बाबा रामदेव ।  आज बाबा रामदेव अगर सत्यागह करने की बात कर रहे हैं तो इसके लिए जिम्मेवार कौन है? लाखों करोड़ रूपया काले धन के रूप में विदेशों में जमा पड़ा है यह आज थोड़े ही डला है, कई सालों से पड़ा है, तो सरकार ने इसे वापिस लाने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए । जब अति की पराकाष्ठा होने पर कोई अन्ना हजारे या बाबा रामदेव की अगुवाई में देश की जनता आवाज उठाने की कोशिश करती है, तभी सरकार उस पर कार्रवाही करने की बात क्यों करती है?
    अन्ना हजारें के आंदोलन में देखा गया कि एक आवाज में देश के लाखों लोग दिल्ली में इक्ठ~ठा हो गए और अब लग रहा है कि बाबा रामदेव के सत्यागzह आंदोलन में उससे भी ज्यादा लोग इक्ठ~ठा होंगे। इससे साबित होता है कि देश का आम आदमी सरकार की नीति व कार्यप्रणाली से त्रस्त है और वो अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा जो टैक्स के रूप में जमा कराता है, उसे यूं लुटते हुए नहीं देख सकता। जनता की भीड़ यह बताती है कि आम आदमी के दिल में आक्रोश है, लेकिन वह अभिव्यक्ति नहीं कर सकता। लेकिन जब उसे जयप्रकाश नारायण, अन्ना हजारे या बाबा रामदेव जैसा पथ-प्रर्दशक मिल जाता है तो वो उसे अपना तन-मन-धन से समर्थन देता है।
    समय रहते हमारी सरकार को इस बारे में गहन चिन्तन करना होगा। क्योंकि सभी जानते हैं कि सहनशीलता की भी एक हद होती है ‘अति सर्वत्र वर्जते’। हमारे नेताओं को अब देश की हवाओं का रूख भांप लेना चाहिए क्योंकि मिश्र, लीबिया जैसे हालात होते हैं तो पूरा देश कई सालों पीछे चला जाएगा।
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    जय हिन्द, जय भारत।
                    - विकास वर्मा