10.10.11

जादुई धरातल पर असली मुलाकात, गzेट मैजिशियन शिव कुमार के साथ

आरा मशीन से कटकर दो टुकड़ों में बंट जाते हैं जादुगर शिवकुमार
प्रश्न- शिव कुमार जी, जादू क्या है? इससे किस प्रकार लोगों का स्वस्थ मनोरंजन हो पाता है?
जवाब- जादू विज्ञान पर आधारित एक कला है, और इस कला को खूबसूरती के साथ पेश करना ही मैजिक है। इसमें सामाजिक संदेश छिपे होते हैं। लोगों को अंधविश्वास से लड़ने की प्रेरणा देता है जादू। इसलिए इससे स्वस्थ मनोरंजन भी होता है।
प्रश्न- अगर जादू एक कला है, विज्ञान है तो फिर जो लोग टोने-टोटके करते हैं, झाड़-फूक करते हैं, वो क्या है?
जवाब- यह बिल्कुल गलत और झूठ है कि टोने-टोटकों या झाड़फूंक से किसी को वश में किया जा सकता है। तंत्र-मंत्र जादू-टोना कुछ नहीं होता है। अगर जादू से किसी की जान ली जा सकती या दी जा सकती तो सरकार देश की सीमाओं की रक्षा के लिए एक जादूगर को नियुक्त कर देती और किसी को शहीद होना नहीं पड़ता। ...लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है। जादू से सिर्फ एक स्वस्थ मनोरंजन हो सकता है, ऐसा मनोरंजन जिससे डिप्रेशन का मरीज भी ठीक हो जाता है।
प्रश्न- ...तो जादू के शो के माध्यम से आप किस प्रकार के संदेश समाज को देते हैं?
जवाब- हम अपने शो में लड़की को गायब करते हैं और फिर उसे वापस बुलाते हैं। उसके बाद मैं दर्शकों को कहता हूं कि ‘असली जादूगर तो आप हैं जो लड़की को हमेशा-हमेशा के लिए गायब कर देते हैं।’ फिर मैं उनसे भzुण हत्या रोकने की अपील करता हूं।...हमारे पास मैजिक की एक बोतल होती है जिसके पास एक व्यक्ति जाता है और वह कंकाल मंे बदल जाता है। इसके बाद मैं कहता हूं कि ‘नशा जीवन का नाश करता है। इसे त्याग दीजिए, अन्यथा कंकाल बन जाएगें।’..तो इस तरह के संदेश हम अपने शो में दर्शकों को देते हैं।
प्रश्न- इन सबके बावजूद क्या है कि लोग जादू व सर्कस के शो में बहुत कम पहुंचते हैं?
जवाब- आज जमाना टीवी-फिल्मों पर आधारित हो गया है। जादू व सर्कस के शो में जो कलाकारियां दिखाई जाती हैं आज वे कैमरा ट्रिक्स की सहायता से फिल्मों में दिखाई जाने लगी हैं। बस यही कारण हैै।
प्रश्न- शिव कुमार जी, आपने अपने देश में भी कई शो किए हैं और विदेशों में भी। जादू कला के लिए कहा जाता है कि यह भारत की देन हैं फिर विदेशी जादुगरों ने भारतीय जादुगरों की तुलना में मजबूत पहचान कैसे बना ली है?
जवाब- यह सत्य है कि मैजिक इंडिया की देन है। जहांगीर नामा में भी इसका उल्लेख मिलता है। यह कला विदेशियों ने हमसे सीखी है या चुराई है। आज वो हवा में प्लेन गायब करते हैं, मकान गायब करते हैं, दीवार गायब करते हैं...तो इसमें करोड़ों का खर्चा होता है। विदेशी जादुगरों को उनकी सरकार से सहायता मिल जाती है, इसलिए वो आगे बढ़ रहे हैं। हमारे यहां ऐसी सहायता नहीं मिलती है।
प्रश्न- क्या मनोरंजन पर किसी प्रकार का कोई कर भी लगा हुआ है?
जवाब- कर बिल्कुल लगा है लेकिन हमारे मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत स्वयं जादुगर हैं। इसलिए उन्होंने जादू कला को टैक्स मुक्त कर रखा है। इससे जादुगरों को काफी राहत मिली है।
प्रश्न- शिव कुमार जी, भारत में जादुकला को सही सम्मान किसने दिलाया और कब से इसको उन्नति मिलने लगी?
जवाब- भारतीय जादुगर हुए हैं पी.सी. सरकार, जिन पर भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया है। उन्होंने अमेरिका में एक थियेटर शो के दौरान एक लड़की को दो भागों में बांट दिया, जिससे वहां के सांइटिस्ट एवं अन्य टैकनीशियन काफी प्रभावित हुए। इसके बाद ही भारतीय जादुगरों को सही सम्मान मिलने लगा।
प्रश्न- अब आपसे आखरी सवाल, आपने जादुकला को क्यों अपनाया और यहां तक कैसे पहुंचे?
जवाब- बचपन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी। एक बार देखा कि एक बाबा छाती के Åपर से ट्रक निकाल रहा था। मैनें उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि यह प्राणायाम का खेल है। धीरे-धीरे ऐसे खेलों के प्रति मेरी जिज्ञासा बढ़ने लगी और मेरी मुलाकात अजमेर के जादुगर ‘राय’ से हुई। जादुगर राय ने मुझे पूरी जादुई शिक्षा दी और आज हम देश-विदेश में अपना शो करके लोगों का मनोरंजन करते हैं तथा उनको अंधविश्वास से लड़ने की प्रेरणा देते हैं।

24.9.11

किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते


 किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते
... कहते हैं हाथों की लकीरों पर भरोसा मत कर, किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते। जी हां, इस कथनी को करनी में बदल दिया है राजस्थान की कोटपूतली तहसील के नारेहड़ा गांव की 14 वर्षीय मुखला सैनी ने। मुखला को कुदरत ने जन्म से ही हाथ नहीं दिये, लेकिन मुखला का हौसला, जज्बा और हिम्मत देखिए, उसने करत-करत अभ्यास के जड़मत होत सुजानकहावत को भी चरितार्थ कर दिखाया है, अब वह अपने पैरों की सहायता से वह सब कार्य करती है जो उसकी उमz के अन्य सामान्य बच्चे करते हैं।
कुदरत ने मुखला को सब कुछ तो दिया, लेकिन जीवन के जरूरी काम-काज के लिए दो हाथ नहीं दिये। बिना हाथों के जीवन की कल्पना करना भी बहुत कठिन है, लेकिन मुखला ने इसे अपनी नियति मान कर परिस्थितियों से समझौता कर लिया है। हाथ नहीं होने पर अब वह पैरों से अपने सारे काम करने लग गई है। पढ़ने की ललक के चलते मुखला पैरों से लिखना सीख गई है और आठवीं कक्षा में पहुंच गई है। मुखला को पैरों से लिखते देखकर हाथ वालों को भी कुछ कर दिखाने की प्रेरणा लेनी चाहिए।14 वर्षीया मुखला एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की है। उसके माता-पिता मजदूरी कर जीवन-यापन करते हैं। ईश्वर ने जब मुखला के शरीर की रचना की होगी, तो शायद दोनों कंधों के आगे उसके हाथ बनाना भूल गया होगा। उपर वाले की इसी भूल को मुखला को अब जीवन भर भुगतना है।
बहरहाल, बड़ी होने पर मुखला गांव के अन्य बच्चों के साथ स्कूल जाने लगी। दूसरे बच्चों को हाथ से लिखते देखकर उसने हिम्मत नहीं हारी और पैरों से लिखने का प्रयास करने लगी। अपनी लगन और परिश्रम से मुखला ठीक तरह से लिखना सीख गई है। इतना ही नहीं वह पैरांे से ही खाना खाती है। खाना खाने के लिए उसे पैरों से ही रोटी का कोर तोड़ना होता है और फिर उसे सब्जी में डुबोकर मुंह तक पहुंचाना, सचमुच आप और हमारे लिए यह किसी कौतुहल से कम नहीं, लेकिन मुखला के लिए यह सिर्फ रोजमर्रा का एक काम है जिसे करना हैसे ज्यादा कुछ नहीं।...आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि मुखला के हाथ नहीं होते हुए भी उसमें स्वावलम्बन व जिम्मेदारी का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। मुखला की मां बताती है कि मुखला अपने नहाने की बाल्टी भी पास के हैंडपंप से खुद भरकर, पकड़कर लाती है। घर में झाडू और पोंचा तक लगा लेती है।...लेकिन अब बेबस है तो सिर्फ सरकार के आगे...मुखला के परिवार एवं गुरूजनों का कहना है कि आम आदमी को जिंदगी जीना सीखातीइस नन्ही बालिका को अब तक किसी प्रकार की कोई सरकारी सहायता या हौसलाअफजाई नहीं मिल पाई है। आठवीं में आते-आते अब मुखला के परिवारजनों को भी चिंता सताने लगी है कि संसाधनों के अभाव में वे मुखला को आगे कैसे पढ़ा पाएगें जबकि मुखला पढ़ने में बहुत होशियार है और वह आगे पढ़ना चाहती है।
कीचड़ भरा रास्ता पार करके पैदल जाती है मुखला स्कूल
मुखला की ढ़ाणी के रास्ते में भरा कीचड़ व फिसलन भी उसके हौसले को फिसला नहीं पाये हैं। वह रोजाना यह सब बड़ी ढृढ़ता से पार करते हुए पैदल ही अपने विद्यालय विवेकानंद सी. सैकण्डरी स्कूलजाती है। इस बात की पुष्टि मुखला की स्कूल के प्रिंसिपल रतल लाल भी करते हैं कि मुखला को अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिल रही है, लेकिन यहां स्कूल में मुखला को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है। मुखला इस स्कूल में बचपन से पढ़ रही है और उसने सब कुछ यहीं सीखा है।

हवा में उड़ी लड़की, आरा मशीन से कटकर दो टुकड़ों में बंटे मैजिशियन शिवकुमार



मैजिशियन शिव कुमार के मैजिक के मैजिकजाल में दर्शक
हवा में उड़ी लड़की, आरा मशीन से कटकर दो टुकड़ों में बंटे मैजिशियन शिवकुमार
कोटपूतली। जी हां, कुछ इसी तरह के हैरतअंगेज कर देने वाले मैजिक कर दर्शकों में कौतुहल व जिज्ञासा के भाव पैदा कर रहे हैं मैजिशियन शिवकुमार। शाम 7 बजे शुभारंभ हुए कोटपूतली में प्रथम शो का शुभारंभ कोटपूतली विधायक रामस्वरूप कसाना के बेटे आदित्य कसाना ने रिबन काटकर किया। इस अवसर पर आदित्य के साथ रोहित, आनंद, गोबिन्द बिदानी, पार्षद शैतान सिंह एवं अन्य अतिथि उपस्थित थे।
    शो के दौरान गzेट मैजिशियन ‘जादूगर’ शिवकुमार ने भzुण हत्या एवं जल है तो कल है जैसे महत्वपूर्ण संदेशों को भी शो के जरिये रेखांकित किया। साथ ही पलक झपकते ही मैजिक बाWक्स से बाहर निकलकर दर्शकों के बीच पहुंच जाना और पलक झपकते ही सांप को लड़की में और लड़की को खुंखार जानवर में बदलने का कारनामा भी जादुगर शिवकुमार ने करके दिखाया।
    जादुगर शिव कुमार के पीआरओ मनीष तिवारी ने बताया कि कोटपूतली में प्रतिदिन दो शो प्रदर्शित होंगे। पहला शो दोपहर 12 बजे से एवं दूसरा शाम 7 बजे से प्रांरभ होगा। तिवारी ने बताया कि उनका कोटपूतली शहर में यह दूसरी बार शो है इससे पहले वे 1 साल पहले यहां आए थे तब दर्शकों ने उनको काफी पंसद किया था, और अब वे एकदम नये जादू के कारनामे लेकर आये हैं जो दर्शकों को काफी पसंद आएगें।

7.9.11

इंस्पायर्ड छात्रवृत्ति के लिए चयनित

मां सरस्वती सी.सैकण्डरी स्कूल, सैमाला का छात्र
इंस्पायर्ड छात्रवृत्ति के लिए चयनित

छात्र को मिलेगें 4 लाख रूपये
कोटपूतली। जी हां, सही पढ़ा आपने। इस छात्र को मिलेगी 4 लाख की छात्रवृत्ति। ...और छात्रवृति देगा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार।...तो देखिए सरकार होनहारों को कितना कुछ देती है। इस छात्र ने विज्ञान वर्ग में उत्कृष्ठ अंक प्राप्त किए हैं, जिसके फलस्वरूप उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारत सरकार ने 80,000 रूपये प्रतिवर्ष, अगले 5 वर्ष तक देने की घोषणा की है। इस प्रकार छात्र को कुल 4 लाख रूपये मिलेेगें। ...और यह होनहार तैयार किया है क्षेत्र में सैमाला खुर्दी रोड़ पर स्थित मां सरस्वती पब्लिक सीनियर सैकण्डरी स्कूल ने।
    संस्था के निदेशक रामावतार कसाना ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि समस्त स्टाWफ व छात्रों में छात्र की उपलब्धि पर गर्व है। छात्र ने उपलब्धि का श्रेय गुरूजनों के आशिर्वाद एवं मार्गदर्शन को दिया है।
    उल्लेखनीय है कि विद्यालय क्षेत्र में कड़े अनुशासन एवं शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इससे पहले विद्यालय के एक अन्य छात्र ने मेरिट में भी स्थान पाया था।

कब चालू होगा 75 लाख का ट्रोमा सेंटर?

कब चालू होगा 75 लाख का ट्रोमा सेंटर?
तैयार है 55 लाख का भवन व 20 लाख की एंबुलेंस   
कोटपूतली। सरकारी मशीनरी किस गति से कार्य करती है, देख लीजिए कोटपूतली के ट्रोमा सेंटर भवन एवं इसके बाहर सभी सुविधाओं से लदकद खड़ी एम्बुलेंस को।
    इस भवन को पूर्णतया तैयार हुए करीब 8 माह से भी अधिक का समय बीत चुका है। अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि खुद अस्पताल प्रशासन भी इसकी अवधि ‘करीब’ या ‘लगभग’ शब्दों में ही बताता है।
    अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस भवन में बिजली, पानी, चैम्बर, ऐसी...अर्थात सभी मूलभूत व आवश्यक सुविधाऐं मुहैया करा दी गई हैं। अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भवन निर्माण में कुल 55 लाख का खर्चा बैठ गया है। इसके अलावा इसके बजट में 20 लाख की अलग से एम्बुलेंस भी शामिल है जो सेंटर के बाहर ही खड़ी रहती है। इसके संबंध में खुद अस्पताल प्रशासन के लोग व अन्य दबी जबान से कहते हैं कि अगर शीघz भवन का उद~घाटन नहीं हुआ तो यह एंबुलेंस फिटनेस के लिए मैकेनिक के पास और भवन की मरम्मत के लिए दोबारा से बजट पास करना पड़ सकता है।...क्योंकि लोगों ने भवन के बाहर गाड़ियां खड़ी करना और इसके अहाते में बैठना व सोना शुरू कर दिया है। कुछ लोग आंख बचाकर भवन को गंदा भी करने लगे हैं।
गुड़गांव से जयपुर के बीच इकलौता सरकारी ट्रोमा सेंटर
        गुडगांव से जयपुर के बीच बीडीएम अस्पताल ही एकमात्र ऐसी सरकारी अस्पताल है जिसमें सभी आवश्यक सुविधाऐं मौजूद हैं। यहां ब्लड बैंक की सुविधा भी मौजूद है। नेशनल हाइवे के दुर्घटनागzस्त मरीजों को यहीं पर रैफर कर लाया जाता है। लेकिन अक्सर घायलों की हालात गंभीर होने एवं यहां ट्रोमा सेंटर अभी चालू ना होने के कारण मरीजों को जयपुर रैफर किया जाता है। लेकिन कई बार मरीज जयपुर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।

23.8.11

...बचाना है वजूद देश के अमर शहीदों के नारों का

सरकार कर रही कौशिश, दबाने की अन्ना ‘हजारों’ को
अन्ना ने दिला दिया याद दूध छटी का , सत्ता के ‘सरदारों’ को
मेरा मुल्क, मेरा देश, मेरी जान है
लगा जोर ऐडी चोटी का, लाना जनलोकपाल है
है सपना अब तो यही, देश के अन्ना ‘हजारों’ का
...बचाना है वजूद देश के अमर शहीदों के नारों का।

जय हिन्द जय भारत।

अन्ना के समर्थन में सदबुद्धि यज्ञ का आयोजन

अन्ना के समर्थन में सदबुद्धि यज्ञ का आयोजन
आदर्शनगर में हरि बृजेश मशाला उद्योग के सामने हुआ यज्ञ

कोटपूतली। यहां हरि बृजेश मशाला उद्योग के समीप क्षेत्रवासियों एवं स्थानीय दुकानदारों ने जनलोकपाल की मांग को लेकर दिल्ली में आठ दिन से चल रहे महाआंदोलन एवं अनशन पर सरकार के अनदेखी रैवये व हठधर्मिता को तोड़ने के लिए  ‘सदबुद्धि’ यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें सभी दुकानदारों ने आहुतियां दी एवं प्रार्थनाऐं की, कि ’जल्दी ही जनलोकपाल पारित करने के लिए सरकार एवं सांसदों को सदबुद्धि दे।
    इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने ‘अन्ना तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं, ‘ गांव गांव ये हवा चली है, ईमानदारी की ज्योत जली है, ‘ अब तो ये स्पष्ट है जो, जो हमारे साथ नहीं वो भष्ट है, जैसे नारे भी लगाये गये।
    यज्ञ में जन कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा, अनिल जांगिड़, बृजेश कुमार सैनी, सुमन कुमावत, श्यामलाल चौधरी, गोपीनाथ शर्मा, भगत चायवाला, संजय जांगिड़, रमेश यादव, कृष्ण सैनी, ’ सहित अनेक दुकानदार व निवासी उपस्थित थे।

21.8.11

अपने विचार हमें newschakra@gmail.com पर भेजें.

अन्ना हजारे का अनशन छठे दिन भी जारी है. टीम अन्‍ना और सरकार, दोनों ओर से वार्ता की जरूरत बताई जा रही है. पर अब तक ठोस पहल नहीं की गई है.
आंदोलन से जुड़े अपने अनुभव, खबरें, या अपने विचार हमें newschakra@gmail.com पर भेजें. हम उसे newschakra.blogspot.com पर प्रकाशित करेंगे. साथ ही न्यूज चक्र अखबार में आपके नाम के साथ प्रकाशित भी करेंगें। धन्यवाद।

जनमत संग्रह करा लिया जाए- भूषण

भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे अन्ना हजारे की ओर से शनिवार को सरकार को यह चुनौती दी गई कि देश की जनता को जन लोकपाल विधेयक और सरकार के लोकपाल विधेयक में से कौनसा प्रारूप पसंद हैए इसे जानने के लिए देश में जनमत संग्रह करा लिया जाए।
         रामलीला मैदान पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए अन्ना टीम के वरिष्ठ सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार और कुछ पक्षों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि जन लोकपाल विधेयक को थोपने की कोशिश की जा रही है तथा सरकार को ब्लैकमेल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आरोप लगाया जा रहा है कि अन्ना ने अपनी बात थोपने के लिए सरकार के सिर पर बंदूक तान रखी है। उन्होंने कहा कि अन्ना के पास कोई बंदूक नहीं है और न ही सरकारी ताकत। जन समर्थन को आंकने के लिए देश में इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराया जा सकता है।

5.8.11

कहां है परिवहन विभाग ?


इन जीपों की तस्वीरे कोटपूतली-बानसूर रोड़ से ली गई है।
स्कूली जीप की तस्वीर बानसूर के एक प्राइवेट विघालय की है।  

परिवहन विभाग की नींद ने छीना आमजन का सुख चैन
    चलना है तो जीप की छत पर बैठ जा या पीछे लटक जा...नहीं तो यूं ही पूरे दिन खड़ा रहेगा। जीप चालकों की यही धोंस अच्छे भले व पढ़े-लिखे आदमी को भी ‘लटकने’ पर मजबूर कर देती है।...और फिर मरता, क्या नहीं करता, कहावत यहीं तो चरितार्थ होती है। बेचारा व्यवस्था का शिकार आदमी करे भी क्या!
    जी हां, परिवहन विभाग की अनदेखी की वजह से गzामीण लोगों को प्रतिदिन जान हथेली पर रख सफर करना पड़ रहा है जिसमें बच्चे, महिलाऐं एवं वृ¼जन भी शामिल हैं।
    Åपर की तस्वीरों को ध्यान से देखिए, एक जीप जिसमें जीप चालक बुकिंग के समय 10 से  अधिक सवारियां नहीं बिठाते वहीं सवारियों के लिए चलते समय ये 30 सवारियां पूरी हुए बिना स्टैण्ड से हिलते भी नहीं हैं।। तस्वीर 1 में एम-1 व्यक्ति को देखिए,  यह व्यक्ति जीप के सबसे आगे के हिस्से पर बैठा है और ऐसी स्थिति में है कि अचानक बzेक लगने पर यह पलक झपकने से भी कम समय में सड़क पर गिर सकता है और दुर्घटना घट सकती है। अब तस्वीर 2 में एम-2 को देखिए, यहां इस छात्र ने जीप के पर्दे को पकड़ रखा है और वह भी एक हाथ से, दूसरे हाथ से इसने अपने बैग को संभाल रखा है। बzेकर या गड~डों से गुजरने के दौरान कभी भी हाथ पर्दे से फिसल सकता है और बस पहुंच गए अस्पताल।
    अब तस्वीर 3 देखिए, यह आपको ज्यादा विचलित कर सकती है। इस जीप में सभी स्कूल छात्र हैं। बानसूर के एक प्राइवेट विद्यालय ने स्कूली बच्चों को यही ‘वाहन सुविधा’ प्रदान कर रखी है। यहां हो सकता है बच्चों के अभिभावकों को इस बात की तसल्ली हो कि स्कूल की गाड़ी बच्चों को घर से लाती व ले जाती हैं, लेकिन इस तस्वीर को देखकर अभिभावक सावधान हो जांए। ध्यान से देखिए इस जीप में तीन स्कूली बच्चे जीप में पीछे पायदान पर आधे-अधूरे लटक रहे हैं। इनमें से एम-3 ;छात्रद्ध तो अपना घुटना मोड़कर हवा में झूल रहा है।...और अब तस्वीर 4 तो आपने देख ही ली होगी। इस तस्वीर में यह छात्र पायदान पर उल्टे मुंह खड़ा है जो कभी भी चलती जीप से गिर सकता है। यह फोटो यह बताती है कि ये स्कूली जीप के ड्राइवर बच्चों का कितना ख्याल रखते हैं।...और आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए अधिकतर स्कूलों में स्कूल वाहन उनके संस्था प्रधान ही चलाते हैं।
    ...तो अब आप ही निर्णय कीजिए कि यह परिवहन विभाग की अनदेखी है या मनमानी छूट, जो जिंदगी से खेल रही है। न्यूज चक्र की प्रशासन से अपेक्षा है कि परिवहन को इसके लिए शीघz पाबंद करें और अभिभावकों से निवेदन है कि स्कूलों में बच्चों की फीस जमा कराकर ही अपने दायित्व की इतिश्री ना समझें, घर से निकलें और घर से स्कूल तक की खबर भी रखना शुरू करें, अन्यथा फिर क्या जब चिड़िया चुग जाए खेत।

20.7.11

आप क्या खाना चाहेगें... 2000 रूपये किलो का गुटखा या 400 रूपये किलो के बादाम

    जी हां, सही पूछ रहा हूं मैं। अपने आसपास लोगों को देखिए या फिर अपने आपको देखिए, क्या खा रहे हैं आप?....गुटखा, तम्बाकू, सिगरेट, पान, जर्दा या फल, मेवे, सब्जी!
    आपको भले ही यह आश्चर्य लगे, लेकिन यह सच है कि अगर आप गुटखा खाते हैं तो आप ‘2000 रू.किलो की वस्तु को कुछ देर मुंह में रखकर थूक देते हैं।’ क्योंकि एक गुटखे का पाउच 2 से 12 रू का आता है और उसमें 2 से 4 गzाम वजन होता है। हां यह बात अलग है कि वह एक पैकेट आपके गाल, दांत, होंठ, जबड़े या आंखों को नुकसान पहुंचाता है, कईयों को तो कैंसर तक हो जाता है। मेरी बात पर यकीन ना आये तो एक बार जयपुर के महावीर कैंसर अस्पताल के किसी वार्ड में घूम आइये। आपको यकीन ही नहीं बल्कि विश्वास भी हो जाएगा कि आप बादाम, काजू जैसे मेवे खाने वाले लागों से दिलदार आदमी हैं। आप कैंसर अस्पताल के किसी वार्ड में घूमेगें तो इतना तो जान ही लेगें कि तम्बाकू- गुटखे से आपका गाल गल सकता है, उसमें कीड़े लग सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे गली में आवारा घूमते किसी जानवर के कान या गर्दन पर लगे होते हैं। आपका जबड़ा आपका साथ छोड़ सकता है। आपकी जीभ बेस्वाद होकर आपका बोलना भी बंद कर सकती है। ...लेकिन यह सब मैं आपको क्यूं बता रहा हूं यह तो आप खुद अस्पताल में घूमेंगे तो जान ही जाएगें। खैर मैं तो यह कह रहा था कि इतना सब देखने के बाद आप गुटखा, तम्बाकू, सिगरेट या जर्दा छोड़ना तो चाहेगें नहीं, क्योंकि छोड़ते तो बहुत पहले ही छोड़ देते, आखिर खाते ही क्यों और फिर कोई चीज छोड़ने के लिए थोड़े ही अपनाई जाती है। वैसे आप शीशा ;दर्पणद्ध तो रोज देखते होगें।...और आपके लाल-पीले दांत भी आपको दर्पण में रोज चिड़ाते होगें।...बस फिर ठीक है जब आपको दर्पण में अपना सड़ा-गला चेहरा देखकर ही शर्म नहीं आती तो भला अस्पताल घूम आने से आपको क्या फर्क पड़ेगा। आप तो खाते रहिए, आंख और मुंह बंद करके, बस। वैसे भी इस दुनिया से एक ना एक दिन तो जाना ही होता है, और फिर दुनिया भी तो पापी हो चली है। इस पापी दुनिया में क्यूं ज्यादा दिन टिकना। लोग वैसे तो मरने नहीं देते। गुटखा-तम्बाकू का सहारा है यह भी मेरे जैसे लोग छीन लेना चाहते हैं तो फिर क्यूं इस दुनिया में टिकने के ख्वाब देखना।
    अब देखो ना, अगर बादाम, अखरोट, काजू, सेब, संतरे, केले जैसी चीज खाएगें तो मोटे हो जाएगें, तदंुरस्त रहेगें और तंदुरस्त रहेगें तो कम्बख्त बुढ़ापा भी देर से आएगा और अगर बुढ़ापा देर से आया तो कमाना भी ज्यादा दिन पड़ेगा और इस मंहगाई के जमाने में कमायें कब तक?
    फिर तो यही ठीक है कि 12रू का एक गुटखा 3 मिनट में खायें पूरे दिन में 15-20 गुटखे मुंह में उड़ेलकर थूके और धरती को लाल करें, अपने दांत, होंठ व गाल लाल करें कम्बख्त वैसे तो लाल होते नहीं और महंगाई को ठेंगा दिखाकर बीपीएल के गेंहू खायें और जल्दी-जल्दी 25-30 साल पूरे कर दुनिया से चले जाएं। ...तो साहब सोच-समझकर तय कीजिएगा कि क्या खाना चाहेंगें आप 2000 रूपये किलो का गुटखा या 400 रूपये किलो के बादाम? तय करते समय यह भी ध्यान रखिएगा कि बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता भी है और बूंद-बूंद से ही घड़ा खाली भी होता है।

यहां आप अपनी टिप्पणी अवश्य छोड़े। धन्यवाद।

5.7.11

....संभालिए छाती में बदनुमा खंजर घोंपती युवा पीढ़ी को

....संभालिए छाती में बदनुमा खंजर घोंपती युवा पीढ़ी को   
अगर आपने देखी हो तो फिल्म ‘‘तथास्तु’’ में संजय दत्त ने बाप के दर्द को बयां करते हुए कहा था कि जब माता-पिता अपने बच्चों को सीने से लगाते हैं तो ऐसा लगता है जैसे भगवान मिल गया हो और बच्चा जब रोने लगता है तो ऐसा लगता है जैसे सारी दुनिया को आग लग गई हो। यानि बच्चे को जरा सी तकलीफ होते ही मां-बाप का दिल दर्द से तड़प उठता है। बच्चे की एक मुस्कान के लिए वो सारी दौलत लुटाने को तैयार रहते हैं और वही बच्चे बड़े होकर बदनामी का बदनुमा खंजर मां-बाप ही छाती में घौंपते हैं तो उन मां-बाप पर क्या बीतती होगी सहज ही अनुमान नहीं लगाया जा सकता। हमारी आधुनिकता की ओर जा रही 21वीं सदी की यह पीढ़ी जहां एक ओर उन्नती के नये आयाम को छू रही है वहीं कुछ बच्चे हमारी जिद व नासमझी के कारण पथ भzष्ट होकर पाप के गर्त में समा रहे हैं।
    हाल ही में कोटपूतली क्षेत्र में हुई घटनाऐं इसी बात का उदाहराण हैं कि बड़ों के पथ प्रदर्शन में कमी के कारण अपने ही मां-बाप, पति या पत्नि, भाई या बहिन, या जान से प्यारे दोस्त का गला रेतते हुए हाथ नहीं कांपते। एक घटना में पत्निी ने पति के दोस्त के हाथों पति की हत्या करवाई। दूसरी में जीजा के भाई ने साले की हत्या की और तीसरी में अपनी ही सगी बेटियों ने मां-बाप को कुल्हाड़ी से कटवा दिया। घटनाएंे तो घट गई। आरोपी पकड़े भी गऐ और उन्हें उनके किये की सजा भी मिल जाऐगी लेकिन इस घटना ने हमारे समाज के सामने एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है कि आखिर हमारी युवा पीढ़ी जा किधर रही है? इस भटकाव के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? यह एक विचारणीय बिन्दु है। जहां तक मेरी राय कि बात है तो मैं इसके लिए खुद मां-बाप को ज्यादा दोषी मानता हूं। उसके बाद मोबाइल और टेलिविजन पर परोसी जाने वाली घटिया सीरियल सामगzी और फिर खुद हमारी युवा पीढ़ी को। क्या मां-बाप इतने व्यस्त रहते हैं कि उनको अपनी औलाद से बात करने और उनके मन की थाह लेने का भी समय नहीं है? या उनके बेटे-बेटी का किसके साथ उठना बैठना ज्यादा है इतनी जानकारी वो नहीं रख सकते। सिर्फ पैसे कमाना ही हमारा ध्येय रह गया है। ...और हमारी भटकती युवा पीढ़ी को क्या कहें? पहले से शिक्षा का स्तर तो बढ़ रहा है लेकिन संस्कारों का स्तर गिरता जा रहा है। किसी घटना को अंजाम देने से पहले अगर वो इसके परिणाम का अन्दाजा भी अगर ना लगा सके तो फिर क्या फायदा ऐसी शिक्षा का। मोबाइल, सुविधा के लिए बना एक यन्त्र है लेकिन इसका जमकर गलत इस्तेमाल करते हैं करने वाले। एसएमएस मैसेज द्वारा पूरी बातचीत हो जाती है, पूरी योजना बन जाती है और बेचारे सीधे-साधे मां-बाप को इसकी भनक भी नहीं लगती। विश्वासघात! जन्मदाताओं के साथ विश्वासघात।इस विश्वासघात का परिणाम-सलाखें और कई जिन्दगियां बर्बाद। क्या इन बच्चों ने वह कहानी नहीं सुनी जिसमें एक युवक अपनी प्रेमिका के कहने पर उपनी मां का दिल निकालकर प्रेमिका के पास पहुंचता है तो वह उसे दुत्कारते हुए कहती है कि भागो यहां से, जो अपनी मां का नहीं हुआ वो मेरा क्या होगा। ...तो जो भी आपको ऐसा गलत काम करने को उकसाता है तो याद रखें वो जिस अजीज का बुरा चाह रहा है उसी का नहीं हुआ तो आपका क्या होगा। आपसे बेहतर मिलते ही वो आपको भी रास्ते से हटवा सकता या सकती है।
    अधिकांश प्रेम कहानियां इस भzम से उत्पन्न होती हैं कि लड़के को लड़की विश्व की सबसे सुन्दर कन्या दिखाई देती है और लड़की को लगता है कि उसके प्रेमी से ज्यादा साहसी और कोई नहीं हो सकता। लेकिन समय की तीखी धूप इस भzम को तोड़ देती है। और सत्य यही है कि प्रेम एक उतंग तीवz लहर है जबकि दांपत्य मंथर गति से बहने वाली शीतल नदी। अत: हमारी सुदृढ़ संस्कृति के अनुसार दांपत्य में विश्वास रखंे। सुखी रहेगें, शांति बनी रहेगी।
    ;आप मेरे विचारों से कहां तक सहमत है। अपने विचार मुझे ई-मेल, newschakra@gmail.com के माध्यम से अवश्य अवगत करायें या अपनी प्रतिक्रिया छोड़े। श्रेष्ठ विचारों को अखबार में भी जगह दी जाएगी तथा मुझे भी खुशी होगी। जय हिन्द, जय भारत।

24.6.11

जिंदा जला दिया जालिमों ने

 जिंदा जला दिया जालिमों ने
शाहपुरा। मामला शाहपुरा तहसील के बागावास चौरासी गांव का है, जहां दहेज के लिए एक विवाहिता को वर्षों तक प्रताड़ित किया जाता रहा और अंत में कोई बात ना बनती देख ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे गत 8 जून को आग के हवाले कर जिंदा जला दिया। आग से बुरी तरह झुलसी विवाहिता ने जयपुर के एसएमएस अस्पताल में पुलिस को पर्चा बयान देकर दम तोड़ दिया।...और अब परिजन न्याय के लिए भटक रहे हैं। परिजनों ने एएसपी विनीत बंसल को एक ज्ञापन सौंपकर आरोपियों को शीघ गिरफ्तार करने की मांग की है।
        उल्लेखनीय है कि इस गांव में यह पहली घटना नहीं है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यहां पहले भी दहेज के लोभी विवाहिताओं को यातनाऐं देते रहे हंै, लेकिन उन पर कोई कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने के कारण यहां दहेज लोभियों के हौसलें बुलंद है। जिसके परिणामस्वरूप ही पूतली निवासी पूजा कुम्हार ‘दहेज’ की भेंट चढ़ी।
पुलिस को क्या बताया पूजा ने दम तोड़ने से पहले-
    विवाहिता पूजा देवी ने पुलिस को बताया कि मेरी शादी शाहपुरा तहसील के बागावास चौरासी में लीलाराम कुम्हार के साथ आठ साल पहले हुई थी। मेरे एक लड़का व एक लड़की है। ससुराल पक्ष के लोग आए दिन मुझे दहेज की खातिर परेशान करते आ रहे हैं। आठ जून को मेरे पति लीलाराम, सास गैंदी व ससुर कगाराम ने मेरे से झगड़ा किया। बाद में मेरे Åपर मेरे पति ने केरोसीन डाल दिया और आग लगा दी। इस घटना से पूर्व मैंने मेरे पिता रोहिताश को झगड़े की इतला दे दी थी। घटना के दौरान शोर शराबा सुनकर आसपास के लोग आए और मेरे घर वालों को इस बारे में बताया। जिस पर मुझे जयपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
    पूजा के पर्चा बयान के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने अपराधियों को शीघz पकड़ने का आश्वासन दिया है। दूसरी और विवाहिता के पीहर पक्ष ने प्रशासन से अपील की है कि ‘अपराधियों को शीघz गिरफ्तार कर उन्हें कड़ी-से-कड़ी सजा दिलवाये ताकि दहेज लोभियों को ऐसा घृणतम कृत्य करते हुए ‘कानून’ का भय हो। इस गांव में पहले भी विवाहिताओं के साथ जुल्म होते रहे हैं लेकिन या तो मामला प्रशासन तक पहुंच नहीं पाता और अगर पहंुचा भी है तो उस पर कोई ठोस कार्रवाही नहीं हुई।
न्यूज चक्र में प्रकाशित खबर। अपनी खबरें हमें ई मेल करें-  newschakra@gmail.com पर

भिवाणी निवासी निकेश की न्यूज चक्र में प्रकाशित कविता ‘भष्टाचार’

भष्टाचार
बेरहम बुझदिलों पर सवार होता है भष्टाचार
बड़ो बड़ों का इमान लुटाता है भष्टाचार
कभी खाकी का दीवाना बन जाता है भष्टाचार
तो कभी काले कोट को अपना निशाना बनाता है भष्टाचार
सीबीआई पर भी बादलों की तरह छा गया है भष्टाचार
देश का पैसा विदेशों में जमा कराता है भष्टाचार
नेताओं के दिल में भूत बनकर बैठा है भष्टाचार
इन्हीं के इशारों पर खून चूस रहा है प्रशानिक भष्टाचार
निकेश सच्चाई तो यह है गमों का रास्ता दिखाता है भष्टाचार
बड़े बड़े को जेल में खड़ा करके रोटी दिलाता है भष्टाचार

निकेश, भिवाणी

सामान्य ज्ञान, नौकरी भर्ती, प्रश्न- उत्तर

 

सामान्य ज्ञान, नौकरी भर्ती, प्रश्न- उत्तर

 

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सामान्य ज्ञान, नौकरी भर्ती, प्रश्न- उत्तर


19.6.11

पति -पत्नि की धारदार हथियार से गला काट कर निर्मम हत्या

कोटपूतली -यहां से आठ किलेामीटर दूर गांव करवास मे विगत रात्रि को सो रहे पति -पत्नि की धारदार हथियार से गला काट कर निर्मम हत्या कर दी।  जिससे करवास गंाव सहित आस पास के गांवो मे सनसनी फैल गयी है। घटना स्थल पर पहुंचे जयपुर जिला देहात के पुलिस अधीक्षक सवाई सिंह को यहां के सभी नेता एवं गांव के पंच पटेलां ने 10 रोज के अन्दर इस निर्मम हत्याकाण्ड का पर्दाफा’ा करने की चेतावनी दी है। इसमं कांगेस के नेता राजेन्द सिंह यादव, जद यू के नेता रामनिवास यादव, जनकल्याण समिति अध्यक्ष अ’ाोक शर्मा, समाजसेवी देवेन्दz दलाल एवं भाजपा नेता कुलदीप धनकड हैं।
    अति0 पुलिस अधीक्षक विनित बंसल के अनुसार विगत रात्रि करवास गांव मंे पप्पू सिंह जाट (45) पुत्र फुलसिंह जाट एवं उसकी पत्नि राजबाला (40) की उनके घर मंे ही धारदार हथियार से गला काट कर हत्या कर दी। सूचना मिलने पर घटना स्थल पर जयपुर से डाWग स्काइड ;खोजी कुत्तेद्ध एवं फिंगर प्रिन्ट वि’ोषज्ञांे को बुलाया गया बाद मंे मृतकांे को पोस्टमार्टम कराकर एफएसएल नमूने लिये गये हैं। इस प्रकिzया मंे दोहपर के तीन बज गये। मृतक राजबाला की गर्दन पर पीछे से वार किया गया एवं मृतक पप्पूराम की गर्दन पर आगे से वार किया गया वार इतना जोरदार था कि एक ही झटके से दोनांे की गर्दन कट गयी रात की घटना का सुबह मालूम पडा।
    मृतक राजबाला अपने घर मंे अन्दर सो रही थी एवं मृतक पप्पू घर के चौक मे सो रहा था। जब यह घटना घटी तो घर मंे मृतक पप्पूसिंह की बडी बेटी रजनी 17 वर्ष, भावना 15 वर्ष एवं बबीता 13 वर्ष के अलावा एक लडका बिल्लु 11 वर्ष घर मंे थे एवं बडा लडका जो द्वितिय वर्ष मंे कोटपूतली पढता है वह घटना के समय घर पर नहीं था। जितेन्दz कोटपूतली मंे किराये पर रहता था। मृतक पप्पूसिंह एवं उसका भाई रोहिता’ा दिल्ली मंे पल्लदारांे की ठेकेदारी करते थे। एवं हाल मंे उसके साले की शादी कराने के बाद उसके ससुराल वालांे से खींचातानी चल रही थी।
    मिली जानकारी के अनुसार मृतक पप्पूसिंह के साले की पत्नि ससुराल मंे नहीं रहना चाहती थी एवं हाल मंे ही उसके पेट मंे जो बच्चा पल रहा था उसको  गर्भपात करके गिरा दिया था। पुलिस अधीक्षक सवाई सिंह ने बताया कि पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है एवं शीघ ही इस हत्याकांड का पर्दाफा’ा

कर दिया जायेगा। आज घटनास्थल पर उपपुलिस अधीक्षक आलोक सिंघल, एएसआई सुरेन्दz सैनी सहित पुलिस फोर्स मौजूद थी।
    मृतक पप्पूसिंह की लडकी भावना बता रही थी कि रात्रि तीन बजे मेरे पिता का फोन बज रहा था जबकि पोस्टमार्टम की रिर्पोट के अनुसार पप्पू की हत्या 18 घण्टे पहले रात्रि 10 बजे हो गई थी। पुलिस ने मृतक पप्पूसिंह के फोन को भी जब्त कर लिया है। जिससे भी हत्या होने का पर्दाफा’ा हो  सकता है। आज इस निर्मम हत्याकांड को लेकर पूरे करवास गांव मंे किसी के घर मंे भी चुल्हा नहीं जला एवं मृतक पप्पूसिंह व उसकी धर्मपत्नि राजबाला को चिता पर एक साथ जलते देख वहां मौजूद सैकडांे गांववासियांे की आंखे नम हो गई।
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4.6.11

क्यों झुलसा रामप्रसाद हादसा या साजिश

पूरी खबर पढ़ने के लिए पेज पर क्लिक करें-

सिर्फ टहनियां काटने का प्रयास हुआ, जड़ उखाड़ने का नहीं

जुलुस निकाला , बांटी खुशियां

पत्रकार ओपी यादव को राष्ट्रीय पुरस्कार

नौकरी -भर्ती, सामान्य ज्ञान, मेडिकल हेल्पलाइन जयपुर, कोटपूतली

राजस्थान में फिर बनाएगी कांगzेस सरकार

2.6.11

बार-बार के आंदोलन लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छे नहीं

    पिछले एक साल के घोटालों से ना केवल जनता की समस्याओं व आक्रोश का गाफ बढ़ा है बल्कि अंतर्राष्टीय स्तर पर भी देश की छवि खराब हुई है। समस्याओं से पीड़ित लोगों के बीच के एक आदमी को जनता यह सोच कर चुन लेती है कि यह भुक्त भोगी है, हमारे ही बीच का है इसलिए यह हमारी समस्याओं का ठीक से समाधान करा पाएगा। लेकिन वही आम आदमी चुनाव जीतते ही खास हो जाता है और देखते ही देखते करोड़ों में खेलने लगता है। और जब कभी एक मंच पर किसी एक पार्टी के नेता द्वारा किसी दूसरी पार्टी के नेता पर उंगली उठाई जाती है तो स्पष्टीकरण के रूप में कहा जाता है कि हमारे नेता का तो बहुत छोटा घोटाला है तुम्हारी पार्टी के नेता ने तो इतना बड़ा घोटाला किया था। इस तरह से बेशक वो एक दूसरे का मूंह बंद करने की कोशिश करते हों लेकिन जनता तो दोनों की ही कारस्तानी देख चुकी होती है और जान जाती है कि एक नागनाथ है तो दूसरा सांपनाथ।
इस तरह राजनेताओं पर से उठते विश्वास के कारण ही आंदोलनों का जन्म हो रहा है। ताजा घटनाकम में पहले अन्ना हजारे और अब बाबा रामदेव ।  आज बाबा रामदेव अगर सत्यागह करने की बात कर रहे हैं तो इसके लिए जिम्मेवार कौन है? लाखों करोड़ रूपया काले धन के रूप में विदेशों में जमा पड़ा है यह आज थोड़े ही डला है, कई सालों से पड़ा है, तो सरकार ने इसे वापिस लाने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए । जब अति की पराकाष्ठा होने पर कोई अन्ना हजारे या बाबा रामदेव की अगुवाई में देश की जनता आवाज उठाने की कोशिश करती है, तभी सरकार उस पर कार्रवाही करने की बात क्यों करती है?
    अन्ना हजारें के आंदोलन में देखा गया कि एक आवाज में देश के लाखों लोग दिल्ली में इक्ठ~ठा हो गए और अब लग रहा है कि बाबा रामदेव के सत्यागzह आंदोलन में उससे भी ज्यादा लोग इक्ठ~ठा होंगे। इससे साबित होता है कि देश का आम आदमी सरकार की नीति व कार्यप्रणाली से त्रस्त है और वो अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा जो टैक्स के रूप में जमा कराता है, उसे यूं लुटते हुए नहीं देख सकता। जनता की भीड़ यह बताती है कि आम आदमी के दिल में आक्रोश है, लेकिन वह अभिव्यक्ति नहीं कर सकता। लेकिन जब उसे जयप्रकाश नारायण, अन्ना हजारे या बाबा रामदेव जैसा पथ-प्रर्दशक मिल जाता है तो वो उसे अपना तन-मन-धन से समर्थन देता है।
    समय रहते हमारी सरकार को इस बारे में गहन चिन्तन करना होगा। क्योंकि सभी जानते हैं कि सहनशीलता की भी एक हद होती है ‘अति सर्वत्र वर्जते’। हमारे नेताओं को अब देश की हवाओं का रूख भांप लेना चाहिए क्योंकि मिश्र, लीबिया जैसे हालात होते हैं तो पूरा देश कई सालों पीछे चला जाएगा।
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    जय हिन्द, जय भारत।
                    - विकास वर्मा

30.5.11

अतिक्रमण ...अतिक्रमण ...अतिक्रमण ...

बानसूर कस्बे में फैल रहा अतिक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। अतिक्रमण के चलते सिकुड़ रही सड़कों एवं आम रास्तों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। बानसूर कस्बे के मुख्य बाजार में अतिक्रमण से रास्ते सिकुड़ गए है वही दंगल चौक बैंक के सामने वाली गली, नायकों वाली गली में अतिक्रमण से आवागमन ही ठप कर दिया है। पूरे दिन रास्तों में खड़े वाहन राहगीरों के सामने मुश्किल खड़ी कर रहे है। ऐसी स्थिति ग्राम पंचायत के सामने बनी हुई है। रोड पर खड़े हाथ ठेले एवं रास्तों में खड़े अवैध वाहन पूरा दिन जाम लगा देते है। प्रतिदिन रोड जाम की समस्या से पुलिस प्रशासन एवं पंचायत अनजान है जिसका खामियाजा आम जन को उठाना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत का मुख्य द्वार ही अतिक्रमण से घिरा पड़ा है। पंचायत गेट के सामने खड़े हाथ ठेले वाले पूरे दिन वाहनों को निकलने में परेशानी पैदा करते है, लेकिन ग्राम पंचायत मूक दर्शक साबित हो रही है। ऐसी ही स्थिति पंस के सामने विद्युत वितरण निगम कार्यालय के सामने बनी हुई है। जहां अवैध वाहनों एवं हाथ ठेलों का जमावड़ा रहता है। तहसीलदार के सरकारी क्वार्टर वाले रास्ते को भी अतिक्रमियों ने अपने कब्जे में ले लिया है। कस्बे के रैफ रल चिकित्सालय के बाहर भी अतिक्रमियों ने अपना कार्य शुरू कर दिया है। अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस प्रशासन कई बार अस्थाई अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाकर कार्रवाई करता है। कई बार यहां पर भी अस्थाई अतिक्रमण हटाया गया, लेकिन कुछ दिन बाद स्थिति ज्यों की त्यों हो जाती है।
गौरतलब है कि एक बार उपखंड प्रशासन ने अभियान चलाकर सरकारी कार्यालयों एवं आम रास्तों से अतिक्रमण का सफया कर दिया था। उसी जगह दोबारा अतिक्रमियों ने अपना कब्जा जमा लिया है, जिससे कस्बे वासियों में रोष व्याप्त है। कस्बे के समस्त नागरिकों ने उपखंड प्रशासन से आम रास्तों में हो रहे अतिक्रमण को तुरंत हटाने की मांग की है। इस संबंध में उपखंड अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि कस्बे के आम रास्तों पर अवैध वाहनों के खड़े रहने से जाम की समस्या बनी रहती थाना प्रभारी को निर्देश दें दिए गये है। आम रास्तों पर खड़े अवैध वाहनों को तुरंत हटाए। शीघ्र ही प्रशासन द्वारा अभियान चलाकर अस्थाई अतिक्रमण को हटाया जाएगा एवं अतिक्रमियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यहां प्रकाशन हेतु आप अपने समाचार हमें newschakra@gmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं।

29.5.11

31 मई को जागृति संस्था मनाएगी कोटपूतली शहर में तम्बाकू निषेध दिवस

नगरपालिका पार्क में जलेगी सिगरेट की अर्थी
कोटपूतली। शहर में 31 मई 2011 (विश्व तम्बाकू निषेध दिवस ) के अवसर पर जन जागृति सेवा संस्था, कोटपूतली की ओर से शहर में तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाएगा। कार्य6म के तहत शहर के अगzसेन भवन में डा. अरविन्द मित्तल एवं सहयोगी डाक्टरों के द्वारा मुंह के कैंसर एवं रोगों के संबंध में जागुरकता शिविर का आयोजन होगा तथा नगरपालिका पार्क में सिगरेट की अर्थी सजाकर एवं उसे जलाकर आमजन को तम्बाकू से दूर रहने की नसीहत दी जाएगी। यह जानकारी मित्तल स्माइल केयर के डा. अरविन्द ने प्रदान की।

27.4.11

प्रोजेक्ट ऐरो का उदघाटन

कोटपूतली। भारतीय डाक विभाग की ओर से संचालित प्रोजेक्ट ऐरो के तहत केन्दzीय सूचना एवं संचार प्रौधोगिकी राज्य मंत्राी सचिन पायलट ने कोटपूतली डाकघर के आधुनिकीकरण किए गये भवन का फीता काटकर उद~घाटन किया। साथ ही कोटपूतली डाकघर से वेब काWन्Ýेसिंग के जरिए शाहपुरा डाकघर में प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया। बाद में राजकीय सरदार स्कूल प्रांगण में उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि दे’ा में एक लाख पचपन हजार पोस्ट आWफिस हैं जिनको प्रोजेक्ट के तहत आपस में जोड़ने में 1877 करोड़ रूपये खर्च होगें तथा इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2012 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। इस अवसर पर पायलट ने गzामीण डाक सेवा पुस्तक का विमोचन भी किया।
    इस अवसर पर क्षेत्राीय विधायक रामस्वरूप् कसाना, चौमूं विधायक भगवान सिंह व मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल राजीव सिंह, डाक सेवा निदेशक अशोक कुमार, सहायक पोस्ट मास्टर जनरल दुश्यंत मुद~गल सहित अनेक अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

26.4.11

शहीद की शहादत को सलाम...कोटपूतली तहसील के मोलाहेड़ा गांव का कैलाश गुर्जर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में हुआ शहीद शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों क्षेत्रवासी व प्रशासनिक अधिकारीगण व जनप्रतिनिधि

शहीद की शहादत को सलाम...


कोटपूतली तहसील के मोलाहेड़ा गांव का कैलाश गुर्जर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में हुआ शहीद
शहीद  की अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों क्षेत्रवासी व प्रशासनिक अधिकारीगण व जनप्रतिनिधि
कोटपूतली। गत 23 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के गुल इलाके में आतंकवादियों से हुई जबरदस्त मुठभेड़ में कोटपूली तहसील के गांव मोलाहेड़ा निवासी श्योराम गुर्जर का पुत्र कैलाश गुर्जर शहीद हो गया। गुर्जर के मुठभेड़ के दौरान सीने में तीन गोलियां लगी। यह जानकारी जिला सैनिक कल्याण अधिकारी राजेश कुमार ने दी।
कोटपूतली के लाल कैलाश गुर्जर के शहादत की खबर मिलते ही समूचा क्षेत्र गांव मोलाहेड़ा शहीद के परिवारजनों को सांत्वना देने पहुंच गया और शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए खुद को गौरवांवित महसूस किया।
शहीद कैलाश गुर्जर सेना की 58 राजपूत राईफल रेजिमेंट में 9 साल पूर्व भर्ती हुआ था तथा गत माह ही 15 दिवस की छुट~टी काटकर ड~यूटी पर गया था। शहीद के एक 1 साल की लड़की व 3 साल का लड़का है। अंतिम संस्कार के दौरान 3 वर्षीय अमित ने ही पिता को मुखाग्नि दी। शहीद को आज सुबह 11 बजे पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

8.4.11

नारेहड़ा में मिले 200 चांदी के मुगलकालीन सिक्के

कोटपूतली। नारेहड़ा की राजकीय प्राथमिक विद्यालय में पानी की टंकी के लिए की जा रही खुदाई के दौरान प्राचीनकालीन सिक्के प्राप्त हुए है। प्र’ाासन के अनुसार से सिक्के चांदी के हैं तथा उर्दु या अरबी भाषा लिखी होने के कारण मुगलकाल के हो सकते हैं। सिक्के मिटटी की एक छोटी मटकी में थे तथा उस पर एक उससे भी छोटा मिटटी का बर्तन रखा था। गांव वालों की सूचना पर पहुंचे एसडीएम दिने’ा जांगिड ने गzामीणों के सामने मटकी से सिक्कों को निकाला और गिनती की। आज के पांच रूपए के आकार के ये सिक्के गिनती में 200 थे।
    गांव मे सिक्के निकलने की खबर के साथ ही सोना निकलने की अफवाह भी फैली जिसके कारण पूरा गांव इन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ा। प्राचीन कालीन ये सिक्के आसपास के गांवों में भी कौतुहल का विषय बने रहे। प्र’ाासन ने इन्हें अपने कब्जे में लेकर पुरातत्व विभाग को भेज दिया है। इस अवसर पर एसडीएम ने खुदाई करने वाले दोनों मजदूरों प्रदीप सिंह व कमल सिंह की ईमानदारी पर खुश होते हुए इन्हें आगामी स्वतंत्रता दिवस पर उपखण्ड स्तरीय समारोह में सम्मानित करने की बात कही है।

4.4.11

लाखों की राह में अतिक्रमण के रोड़े

    कोटपूतली। शहर में दिनों दिन बढ़ रहा अतिक्रमण अब शहर नगरपालिका पर ही भारी पड़ने लगा है। यहां पंचायत समिति के सामने करीब 20 लाख की लागत से सड़क का निर्माण कार्य कराया जा रहा था, लेकिन इस राह में आगे अतिक्रमण होने के कारण सड़क निर्माण कार्य अब अधूरा ही छोड़ दिया गया है।
    उल्लेखनीय है कि यह सड़क तहसील की कई पंचायतों को शहर से जोड़ती है लेकिन सड़क किनारे वर्षों पुराने निर्माण कार्य होने के कारण अब इस राह के ‘कांटे सुलझाना’ नगरपालिका के लिए कठिन हो गया है।  इस सबंध में पूर्व में नगरपालिका चेयरमेन रहे वर्तमान चेयरमेनपति प्रकाश चंद सैनी कहना है कि सड़क पर कई प्रभावशाली लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है जिनको अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दिया गया था लेकिन अब उनके द्वारा कोर्ट स्टे लेने के कारण सड़क निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सैनी ने रोष व्यक्त किया कि लोग विकास के कार्यों के प्रति सजग नहीं हैं, फालतु का अडंगा लगाकर विकास कार्यों को रोकने की कौशिश करते हैं। इसमें प्रशासन को भी सजग रहने की आवश्यकता है कि कोई बेवजह स्टे लेकर समय बर्बाद ना करे। वैसे नगरपालिका कानून 2009 की धारा 245 के अनुसार अतिक्रमणकारी को 3 साल तक की सजा हो सकती है।
    यह सड़क वर्तमान में पंचायत समिति से नागाजी की गौर तक बनायी जानी है, जिसकी दूरी लगभग 370 मीटर और इस पर लागत करीब 20 लाख होगी।

24.3.11

खुले पड़े नालों से पड़े ‘जान के लाले’

्षेत्र के बानसूर रोड़ पर वार्ड 26, 27 में खुले पड़े नाले को ढ़कने बाबत बसपा के तहसील प्रभारी दीपचंद आर्य ने नगरपालिका अधिशाषी अधिकारी एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार ‘ज्ञापनों ’ के माध्यम अवगत करवाया है। लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस लापरवाही का नतीजा यह रहा कि अब तक इस नाले में गिरने से एक पुरूष की मृत्यु हो चुकी है तथा गत सप्ताह ही एक पांच वर्षीय बच्ची भी इसमें गिरकर जिंदगी गंवा चुकी है। इसके विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिला मंत्री मुकेश गोयल व देहात अध्यक्ष बनवारी लाल यादव की अगुवाई में नगरपालिका कार्यालय पर अधिशाषी अधिकारी का घेराव भी किया। साथ में शिवसेना के उप जिला प्रमुख अमरसिंह कसाना, बजरंग लाल शर्मा ने भी रोष जताया। लेकिन अभी तक वहां किसी प्रकार की कार्रवाही नहीं की गई है।
दूसरी ओर क्षेत्र के आदर्श नगर में टेलीफोन एक्सचेंज वाली रोड़ पर बना नाला भी जगह जगह से खुला पड़ा है। इस रोड़ पर यातायात का भारी दवाब भी रहता है तथा स्कूल व कॉलेज विद्यार्थियों का आवागमन भी यहीं से अधिक होता है। इस समस्या को कई बार समाचार पत्रों ने प्रमुखता से उठाकर प्रशासन तक पहुंचाने की कौशिश की हैं। लेकिन यहां भी ‘आरामपसंद’ कर्मचारियों ने कोई कार्रवाही करना उचित नहीं समझा। इस नाले में एक जीप भी पलट गई थी, हालांकि उसमें कोई आहत नहीं हुआ था। पशु तो इस नाले में आए दिन गिरते ही रहते हैं। ठीक ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के लक्ष्मीनगर में चानचकी रोड़ पर बने नाले की है।

प्रभा की ‘प्रतिभा’ को मिला अवार्ड

विभिन्न तरह की समस्याओं एवं राजनीतिक प्रपंचों से घिरे इस शहर में जहां लोग अपने आसपास की छोटी-छोटी समस्याओं से दबे हुए हैं वहीं क्षेत्र की इस महिला अधिवक्ता ने जनसमस्याओं को अपनी बुधि चातुर्य और दबंगता से उठाकर ना केवल वकालत के क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक और महिलाओं के बौधिक उत्थान के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। शहर की सफाई से लेकर चिकित्सा-स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा एवं बस-स्टैण्ड, बिजली-पानी जैसी समस्याओं के निराकरण के लिए भी इस ‘प्रतिभा’ ने पुरजोर आवाज उठाई है और उनका निराकरण भी हुआ है। शहर की जनसमस्याओं को लेकर जनहित याचिका लगाने में भी इनका अव्वल स्थान है। क्षेत्र की इस काबिल महिला अधिवक्ता से ‘न्यूज चक्र’ की बातचीत के खास अंश...।

प्रश्न- प्रभा जी, सर्वप्रथम आपको पंजाब केसरी समाचार पत्र द्वारा ‘वुमन केसरी’ का खिताब प्राप्त होने पर हार्दिक शुभकामना।...आप महिला अधिवक्ता हैं और शहर कोटपूतली ग्रामीण परिवेश में ढ़ला हुआ हैं, आपने यहां अपने आपको अपने क्षेत्र में कैसे व्यवस्थित किया?
जवाब- जी हां, कोटपूतली क्षेत्र में शहरी की बजाय ग्रामीण परिवेश की झलक अधिक दिखाई देती है।...तो स्वाभाविक है कि शुरूआत में मुझे भी यहां काफी परेशानी हुई। मेरे पति, जो मुझसे पहले से वकालत कर रहे थे, उनके कार्य पर भी इसका प्रभाव पड़ा। लोग मुझे उनके साथ देखकर हमारी टेबल तक आने में झिझकते थे। लेकिन मैनें स्थिति को भांपते हुए ग्रामीणों से ग्रामीण भाषा एवं आत्मीयता से बातचीत करने के तरीके को अपनाया, और आज हमारी मेहनत और हमारी मंजिल हमारे सामने है।
प्रश्न- आपने कहां तक शिक्षा प्राप्त की है?
जवाब- मैं एम.ए., एलएलबी हूं।
प्रश्न- आप वकील हैं, नियमित प्रेक्टिस करती हैं फिर सामाजिक क्षेत्र की ओर झुकाव या लगाव कैसे हुआ?
जवाब- मैं जब वकालत के लिए घर से निकलती तो सामाजिक समस्याओं की ओर ध्यान जाने लगा, ये समस्याऐं इतनी गंभीर थी लेकिन किसी का ध्यान इस तरफ नहीं था, सबको आंखे बंद कर आगे बढ़ने की आदत पड़ी हुई थी। मैंने कुछ समस्याओं का समाधान ताल्लुक विधिक सेवा समिति में जनहित याचिकायें पेश करके, संबंधित अधिकारियों को नोटिस भिजवाकर के करवाया। कुछ समस्याओं को ज्ञापन व प्रेस विज्ञप्तियों की सहायता से हल करवाया। बस फिर जैसे-जैसे समस्याऐं हल होनें लगी, मेरी इस ओर रूचि बढ़ने लग गयी।
प्रश्न- आपने सामाजिक कार्यों के द्वारा शहर को काफी करीब से देखा है, मैं जानना चाहुंगा कि आपकी नजर में शहर में हो रहे विकास कार्यों की दिशा क्या है?
उत्तर- शहर में इन दिनों काफी विकास कार्य हो रहे हैं। सड़के भी बन रही हैं, हाइवे पर पुल निर्माण का कार्य चालू है। देखने में शहर में विकास हो रहा है लेकिन शहर की मूलभूत समस्याऐं यथा बस-स्टैण्ड, पार्किंग, सीवर लाईन जैसी समस्याऐं तो अभी वहीं की वहीं हैं फिर शहर मंे विकास कार्य हुआ, कैसे कहा जा सकता है।... और फिर हमारे यहां खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम भी नहीं है।
प्रश्न- अच्छा, शहर की बड़ी समस्याओं को छोड़ दें, सिर्फ यहां सफाई व्यवस्था की बात करें तो एक नागरिक होने के नाते क्या आप सफाई व्यवस्था से संतुष्ट है?
उत्तर- शहर में जैसी सफाई है सबके सामने हैं, कहने की आवश्यक्ता नहीं है कि नगरपालिका अधिशाषी अधिकारी ने कभी शहर का दौरा कर सफाई व्यवस्था का जायजा भी लिया हो!
प्रश्न- एक महिला होने के नाते आप शहर की महिलाओं से क्या अपेक्षा रखती हैं या उन्हें क्या संदेश देना चाहती हैं?
उत्तर- मैं चाहती हूं कि महिलाऐं अपनी ताकत को समझें। आज महिलाऐं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। हर समस्या का समाधान है, हौसले के साथ समस्या का सामना करना सीखें।

12.3.11

संसदीय सचिव ब्रह्मदेव कुमावत 13 मार्च को कोटपूतली में

कोटपूतली। संसदीय सचिव ब्रह्मदेव कुमावत 13 मार्च को कोटपूतली पधार रहे हैं। वे यहां सुदरपुरा रोड़ स्थित प्रजापति छात्रावास में आयोजित अश्टम प्रतिभा सम्मान समारोह’ को संबोधित करेगें तथा आरएएस बनवारीलाल बासनीवाल द्वारा बनवाई गई पानी की टंकी का उदघाटन कर छात्रावास को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर उनके साथ आरपीएससी चेयरमैन एम एल कुमावत, पदमश्री अर्जुन प्रजापति, विधायक मदन प्रजापति, निर्मल कुमावत, रामस्वरूप कसाना एवं पूर्व विधायक हरीश कुमावत व पूर्व मंत्रि सुरेन्द्र गोयल भी होंगे। इस अवसर पर प्रजापति समाज के कई बड़े भामाशाह भी शिरकत कर रहे हैं।

10.3.11

वाहनों की शान, नम्बर प्लेट पर लिखा उपनाम...पूरी खबर पढ़ने के लिए पेज पर क्लिक करें..

सरकारी विघालयों में अच्छी पढ़ाई होती है- एडीएम

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