26.12.14

कड़ाके की ठंड के बीच गरीब को राहत देने पहुंचा ‘सफर’


कोटपूतली। कड़ाके की ठंड के बीच गरीब को राहत देने के उद्देश्य से सफर संस्था की ओर से कोटपूतली पुलिया, सुन्दरपुरा रोड़, मानसरोवर काॅलोनी, लक्ष्मीनगर और बानसूर रोड़ पर गाडि़या लुहार परिवार, झाडू बनाने वाले और बंजारा बस्ती में गर्म ऊनी कपड़े, कम्बल और बच्चों को बिस्कुट वितरित किए गए। सफ़र के साथी पत्रकार विकास वर्मा ने बताया कि सफर संस्था पिछले 10 दिनों से कोटपूतली शहरवासियों से पुराने कपड़े एकत्रित कर रही थी। इस दौरान संस्था को करीब 150 पुराने गर्म कपड़े और 43 कम्बल प्राप्त हुए थे। जिन्हें सफर के साथियों ने गरीबों में वितरित किया। इस दौरान सफर के साथी अनिल दौसोदिया, बृजभूषण कौशिक, समाजसेवी बालकृष्ण सैनी, अभिषेक एवं गितांजलि कौशिक सहित सफर के अन्य साथी मौजूद थे।

10.9.14

अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ा भामाशाह कैम्प


कोटपूतली। तहसील की गोरधनपुरा ग्राम पंचायत के लिए राजीव गांधी सेवा केन्द्र, गोरधनपुरा पंचायत पर लगा भामाशाह योजना शिविर घोर अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया। शिविर में भारी संख्या में महिलाऐं परिवार सहित भामाशाह एवं आधार कार्ड बनवाने पहंुची, लेकिन उपस्थित भीड़ के समक्ष सरकारी लवाजमा बौना नजर आया। नतीजतन धीमी कार्य गति से नाराज ग्रामीणों का रह-रहकर आक्रोश फूट पड़ा। कार्य में शीथिलता से नाराज ग्रामीणों ने एकबारगी तो राजीव गांधी सेवा केन्द्र का मुख्य चैनल गेट को हिला-हिलाकर तोड़ने की भी कौशिश की, जिस पर मौके पर मौजूद तहसीलदार ने बुजुर्ग ग्रामीणों की सहायता से आक्रोशित युवाओं को शांत कराते हुए स्थिति पर काबू पाया, और व्यवस्था बनाने के लिहाज से स्वयं ही चैनल गेट के दरवाजे पर कुर्सी डालकर बैठ गए।
    शिविर में नाराजगी इस कदर थी कि भामाशाह कार्ड बनवाने आयी बबिता देवी, मणि देवी, जयप्रकाश यादव इत्यादि ने बताया कि शिविर भरे जा रहे फार्मों में भारी त्रृटियां की जा रही हैं। किसी का नाम गलत तो किसी बच्ची की आय ही 20 हजार सालाना दिखा रहे हैं। कृषक को मजदूर और मजदूर को कृषक दिखाने जैसी त्रृटियां तो बहुत ज्यादा हैं। वहीं आसपुरा ग्राम के जलदीप, अनिल यादव व रामस्वरूप ने बताया कि शिविर में ‘मुंह देखकर तिलक किया जा रहा है’, गांव के अब तक मात्र 7 फार्म ही जमा किए गए हैं।
प्रधानमंत्री जनधन योजना में उमड़े लोग
वहीं दूसरी ओर राजीव गांधी सेवा केन्द्र परिसर में ही लगे प्रधानमंत्री जनधन योजना शिविर के तहत 124
बैंक खाते खोल गए। इस शिविर के प्रति लोगों का अच्छा रूझान देखा गया था ग्रामीणों में संतुष्टि भी देखी गई। शिविर में एक दिन पहले 272 ग्रामीणों के बैंक खाते खोले गए थे। शिविर में बैंक मित्र धर्मपाल, रणजीत, त्रिलोक चंद, सहायिका सरोज देवी एवं यूको बैंक कोटपूतली शाखा के सहायक प्रबंधक अनिल कुमार ने अपनी सेवाएं दी। सहायक प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया कि जनधन योजना के तहत लोगों में अच्छा आकृषण देखने को मिल रहा है तथा ग्रामीणों के संतोष एवं सहयोग के साथ ही हमने दो दिन में 396 खाते खोल दिए हैं।

8.9.14


राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम की ओर से एक दिवसीय निःशुल्क रोजगार परामर्श सेमीनार आयोजित

कोटपूतली। राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम की ओर से कस्बे के अमरपुरा रोड़ स्थित सजना पब्लिक सी सैकण्डरी स्कूल में एक दिवसीय निःशुल्क रोजगार परामर्श सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमीनार में निगम के जिला कार्यकर्ता विशाल, योगेश एवं हनुमान सहाय शर्मा ने उपस्थित सैकड़ों युवाओं को टेलरिंग के क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार प्राप्त करने की जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम प्रदेश के गरीब, ग्रामीण, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व बीपीएल सहित समाज के विभिन्न वर्गाें के 16-35 साल के बेरोजगार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराने में मदद करता है। इसके तहत न्यूनतम 8 वीं पास योग्यता धारक युवा भी आवेदन कर सकता है।
    निगम के जिला कार्यकर्ता हनुमान सहाय शर्मा एवं योगेश ने जानकारी दी कि निगम का उद्देश्य राज्य के बेरोजगार युवक-युवतियों को विभिन्न कौशल प्रशिक्षण जैसे सुरक्षा गार्ड, भवन निर्माण, कार्यालय प्रबंधन, हाॅस्पिटेलिटी, आई.टी., अकाउण्ट्स इत्यादि क्षेत्र में प्रशिक्षण दिलाना एवं उन्हें राज्य एवं राज्य के बाहर रोजगार हेतु तैयार करना है। शर्मा ने बताया कि टेलरिंग के क्षेत्र में प्रशिक्षण के पश्चात प्रशिक्षणार्थी को रेमण्ड कम्पनी में नौकरी दी जाती है। रेमण्ड जो ब्रांडेड वस्त्र फैशन रिटेलर हैं राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग एवं आरएसएलडीसी के सहयोग से बेरोजगार युवाओं को रोजगार सुनिश्चितता की व्यवस्था करता है।
    सेमीनार में करीब 150 युवाओं ने हिस्सा लिया। सेमीनार का संचालन सजना पब्लिक सी सै स्कूल के संचालक धर्मवीर कुमावत ने किया। सेमीनार के दौरान उपस्थित समाजसेवी पूर्णमल का साफा पहनाकर स्वागत किया गया। सेमीनार के अंत में सेमीनार व्यवस्थापक विकास वर्मा ने निगम के जिला कार्यकर्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया।

19.8.14

एकाग्रता बनाये रखें तो सफलता जरूर मिलती है- रविन्द्र सिंह


सिविल सेवा परीक्षा में 333वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने रविन्द्र सिंह से न्यूज चक्र संपादक विकास वर्मा का साक्षात्कार.....

प्रश्न- आईएएस बनने के बारे में कब सोचा और इसके लिए कब से तैयारी आरंभ की?
यह एग्जाम देने का मन मैंने काॅलेज में ही बना लिया था. ग्रेजुएशन करके 6 महीने नौकरी करने के बाद इस्तीफा दे कर मैंने फिर नियमित रूप से इसकी तैयारी शुर्रु कर दी।
प्रश्न- इस परीक्षा में यह आपका कौन-सा अटेम्प्ट था? पहले के प्रयासों से क्या सबक लिए?
यह पूरी तैयारी के साथ मेरा पहला प्रयास था हालांकि कॉलेज में पढ़ते हुए भी मैंने एक प्रयास दे दिया था। सबक लेने के लिए मैंने उन लोगों से संपर्क किया जो पहले से तैयारी कर रहे कर रहे थे ताकि मुझे पता चल सके क्या पढ़ना है और कैसे उत्तर लिखे जाते हैं।
प्रश्न- अपना परिणाम जानने से पहले आप टाॅपर्स के बारे में क्या सोचते थे?
मेरा सदा से यही मानना रहा है की कोई भी मेहनत और लगन के साथ इस परीक्षा में अच्छा स्थान ला सकता हैं और इन गुणों के लिए में उनका बहुत सम्मान करता था
प्रश्न- मुख्य परीक्षा आपने किन-किन ऐच्छिक विषयों को चुना था?
मैथ्स (गणित)
प्रश्न- क्या आपने इस खास परीक्षा के लिए कोई खास स्ट्रेटेजी अपनाई?
कोई ख़ास स्ट्रेटेजी नहीं थी। बस ये ध्यान रखता था की पाठ्यक्रम में से कुछ छूटे नहीं और जो पढ़ा है वह अच्छे से समझ में आये और फिर नियमित रूप से संशोधन और उत्तर लिखने का अभ्यास करता था। साथ ही खुद से सोचता था की कौन कौन से प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
प्रश्न- )णात्मक अंकन ;नेगेटिव मार्किंगद्ध के लिए क्या सावधानी बरती?
सिर्फ वही सवाल हल करता था जिसमे या तो सही जवाब पता हो या फिर कम से काम 2 गलत विकल्प हटा दिए हों।
प्रश्न- इस परीक्षा में बैठने का निर्णय लेने के बाद आपका पहला कदम सबसे कठिन होता है। शुरू में तैयारी के लिए आपको सही सलाह कहां से मिली?
मैंने इंटरनेट पर टाॅपर्स के ब्लाॅग और इंटरव्यू पढ़कर और पहले से पढ़ रहे साथियों की सलाह से तैयारी आरम्भ की थी की कौनसी किताबें पढ़नी चाहिए इत्यादि।
प्रश्न- काफी उम्मीदवार मुख्य परीक्षा तो पास कर लेते हैं लेकिन साक्षात्कार में असफल हो जाते हैं, आप का साक्षात्कार कैसा रहा? साक्षात्कार हेतु किस प्रकार की तैयारी की?
मेरा साक्षात्कार अच्छा गया था। मैंने पहले ही इंटरनेट पर देख लिया था की किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं और उसके अनुसार तैयारी की थी और यह भी पाया की साक्षात्कार में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह होती हैं की आप आत्मविश्वास के साथ जाएँ और जितना आता हो सके खुश रहकर जवाब दें और बाकी प्रभु पे छोड़ दें।
प्रश्न- आप झुझंनू के रहने वाले हैं ? क्या झुझंनू से संबंधित कोई प्रश्न भी इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों ने पूछा?
नहीं, मुझसे झुंझुनू से सम्बंधित कोई प्रश्न नहीं पुछा गया था परन्तु राजस्थान में पानी की किल्लत पर प्रश्न पूछा गया था की ISRO ने इस सम्बन्ध में हाल ही में कौनसी परियोजना शुरू की है।
प्रश्न- आज के बदलते आर्थिक परिदृष्य में निजी क्षेत्र में सेवाओं के लुभावने अवसर उपलब्ध होने के बावजूद आप सिविल सेवाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बाद भी गम्भीरता से तैयारी में लगे रहे, आखिर किस चीज ने आपका जोश बरकरार रखा?
सिविल सेवा देश के विकास में योगदान देने और समाज के लिए कुछ करने का अवसर देती है और सैलरी भी अच्छा जीवन व्यतीत करने के लिए पर्याप्त होती है। यह सब निजी क्षेत्र में काम करके भी किया जा सकता है लेकिन सिविल सेवा में अच्छा काम करने के अवसर ज्यादा होते हैं। मैं इस अवसर को खोना नहीं चाहता था इसलिए अच्छे से तैयारी करने का मन बना लिया।
प्रश्न- आपको किस तरह और कब सिविल सेवाओं की गरिमा एवं महत्व का अनुभव हुआ?
मुझे शुरू से ही अखबार पढ़ने और आस पास की चीज़ों को जानने की उत्सुकता थी जिस वजह से मुझे पता चला की सिविल सेवक देश के प्रशासन में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न- आप ने शिक्षा कहां से हासिल की?
मैंने IIT Bombay से कंप्यूटर विज्ञान में B.Tech. एवं मैनेजमेंट में माइनर डिग्री की है।
प्रश्न- आप अपने और अपने परिवार के बारे में कुछ बताएं ?
मेरे पिताजी श्री देवकरण सिंह अभी इनकम टैक्स विभाग में संयुक्त आयकर अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। माँ श्रीमती सुशीला सिंह गृहणी हैं। मेरी दो बड़ी बहनें हैं - प्रीति सिंह पलसानियां एवं स्वाति सिंह और दोनों डाॅक्टर हैं। एक जीजाजी डाॅक्टर महेंद्र पलसानियां कोटपुतली में हैं और जीजाजी डाॅक्टर मंजीत सिंह जयपुर में। मुझे खाली समय में बैडमिंटन खेलना और कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग करना पसंद है।
प्रश्न- सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे यूथ को आप क्या सुझाव देंगें ?
इस परीक्षा की अवधि बहुत बड़ी है, इसलिए यह आवश्यक होता है की हम हर समय एकाग्रता बनाये रखें और परिणाम के बारे में चिंतित होने की जगह मेहनत करने पे ध्यान रखें। बाकि पढ़ने के तरीका तो सबका अलग होता है।
प्रश्न- आज के दौर में अधिकांश बच्चे और युवा मोबाइल, मीडिया और मनी के चलते भटकाव की स्थिति में हैं, क्या आप इस से सहमत हैं?
मोबाइल, मीडिया आदि अपने आप में बुरी चीज़ें नहीं हैं, हमारे ऊपर है कि हम उनसे ज्ञान प्राप्त कर और लोगों से संचार करके उनका लाभ उठाएं या व्यर्थ के काम में आप समय गवाएं। इस तरह से हमें अपने विवेक का उपयोग करते हुए आधुनिक प्रोध्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए।

18.8.14

ओवरलोड चलते हैं, और...पलट जाते हैं...यमदूत बनकर

    यह किसी फिल्म का सीन नहीं, बल्कि एक ऐसी दुखद हकीकत है, जिसे कोटपूतली के बाशिंदे हर रोज झेलते हैं। गांव से मजदूरी पर निकला कोई मजदूर हो या किसी कम्पनी का ओहदेदार प्रशासनिक अधिकारी।...हर किसी के जहन में बस एक ही डर रहता है कि पता नहीं ‘कोटपूतली क्राॅस ’ हो पाएगा कि नहीं? पता नहीं जाम में फंस जांए या जान ही चली जाए।
    कोटपूतली में सर्विस लाइन को लेकर आए दिन होने वाली दुर्घटनाऐं इसी ओर इशारा करती हैं कि ‘यहां चलना खतरे से खाली नहीं हैं।’  अगर यकीन ना हो तो कोटपूतली मैन चैराहे से लक्ष्मीनगर मोड़ तक की सर्विस लाइन के हालात देख आइए। यकीनन आपके चेहरे का रंग तो बदरंग नजर आएगा ही सेहत भी डाॅक्टर की सलाह लेने को कहने लगेगी।
    ...लेकिन इन सब से शायद हमारे जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को कोई खास मतलब नहीं है, तभी तो दिन में एक-दो दफा़ यहां से अगर गुजरते भी हैं तो आंखे मूंदकर। (ऊपर) न्यूज चक्र द्वारा कोटपूतली पुलिया से डाबला रोड़ पर ली गई ये तस्वीरें ओवरलोडेड डम्परों की स्पष्ट तस्वीरें बता रही हैं कि दिनदहाड़े कैसे कोटपूतली प्रशासन के नाक के नीचे ओवरलोडेड वाहनों का आवागमन होता है।...और तो और किसी ओवरलोड वाहन द्वारा रास्ता जाम हो जाने पर उसके खिलाफ कोई खास कार्रवाही नहीं होती।
    यह सब यहां कोटपूतली के बाशिंदे भुगतने को मजबूर हैं।
    ऐसे ही पीड़ा से तंग आकर कोटपूतली नगरपालिका के वार्ड 12 के पार्षद भीखाराम सैनी ने निर्माण कम्पनी के परियोजना निदेशक सुभाष जानू व एक डम्पर ड्राइवर पर नामजद इस्तगासा पेश किया है। वहीं दूसरी ओर मोलाहेड़ा गांव के बाशिंदांे ने भी गांव के मुख्य द्वार के सामने केवल राहगीरों के लिए अण्डरपास देने का विरोध करते हुए राजमार्ग को आधे घण्टे तक जाम कर विरोध दर्ज कराया। जबकि समस्या लक्ष्मीनगर मोड़, गोपालपुरा मोड़ एवं बीडीएम अस्पताल के मरीजों के लिए भी नासूर बनी हुई है।

4.8.14

युवती ने किया आत्महत्या का प्रयास


https://www.facebook.com/vikasverma.kotputli

Date- 4/8/2014
कोटपूतली बडाबास मौहल्ला निवासी एक युवती ने पैडोसी युवक के द्वारा परेशान किये जाने पर अपने हाथ की नसें काट ली। स्थिति गंभीर होने पर उसे राजकीय अस्पताल में दाखिल करवाया गया। युवती की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है । परिजनो व युवती के अनुसार पड़ोस में ही रहने वाला एक युवक मोबाइल में वीडीयों रिकोर्डिग करने के बाद सार्वजनिक करने की धमकी देकर युवती पर जबरन शादी करने का दबाव बना रहा है । जिससे तंग आकर युवती ने अपने हाथ की नशे काट ली ।
पुलिस ने अस्पताल पहुचकर युवती से पुछताछ की । पुलिस मामले की जांच कर रही है। राजकीय अस्पताल में युवती के बयान लेने पहुंचे थाना प्रभारी लक्ष्मीकान्त शर्मा के अनुसार वह मामले की जांच कर रहे हैं। अभी तक एक पडोसी युवक के दवारा परेशान करने की बात सामने आई है ।

27.7.14

झाडि़यों के बीच मिली जिंदा बच्ची

click here...
http://youtu.be/o1pYkKABxfo
इसे इतना शेयर करो कि बच्ची के दर्द की आवाज बेरहम ‘मां’ तक पहुच जाए।

कोटपूतली के ग्राम गोपालपुरा के समीप आज (27/07/2014) सुबह जिंदा नवजात बच्ची मिली है। बच्ची को बेरहम ‘मां’ ने झाडि़यों के बीच पटका हुआ था, जिस पर चिंटिया लगने लग गई थी। झाडियों एवं चिंटियों के खरोच के निशान बच्ची पर आसानी से देखे जा सकते हैं। बच्ची को संभवतया आज तड़के ही झाडियों में पटका गया था, सुबह शौच के लिए निकले ग्रामीणों ने बच्ची के रोने की आवाज सुनकर बच्ची को संभाला और कोटपूतली पुलिस को सूचना दी। कोटपूतली पुलिस ने तत्परता बरतते हुए बच्ची को कोटपूतली के राजकीय बीडीएम अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां बच्ची का इलाज जारी है। पुलिस व डॉक्टरों के अनुसार बच्ची संभवतया दो या तीन पहले पैदा हुई है। पुलिस बच्ची के निर्दयी मां-बाप की तलाश में जुट गई है।

20.7.14

बालवाहिनी के नाम पर ‘दुघर्टना वाहिनी’ दौड़ा रहे स्कूल

बालवाहिनी के नाम पर ‘दुघर्टना वाहिनी’ दौड़ा रहे स्कूल

    कोटपूतली। कस्बे में सैकडों निजी विद्यालय हैं जिनमें परिवहन व्यवस्था के लिये बाल वाहिनी के नाम पर स्कूल संचालकों ने बसों व टैम्पों की व्यवस्था कर रखी है लेकिन सुरक्षा मानकों को लेकर ना कोई संस्था गंभीर है और ना ही परिवहन विभाग और ना ही अभिभावक। नतीजतन संस्था प्रधानों द्वारा मामूली से लालच को लेकर छात्र छात्राओं की जिंदगी के साथ सरेआम खिलवाड किया जा रहा है। शिक्षा विभाग व परिवहन विभाग की उदासीनता के चलते निजी विद्यालय परिवहन के नाम पर छात्रों के अभिभावकों से मोटी रकम वसूल कर रहे हैं लेकिन सुरक्षा व्यवस्थाओं की बात करें तो इन संस्थाओं में ढाक के तीन पात नजर आते हैं। बीस सीटर मिनी बसों में चालीस से पचास विद्यार्थियों को ठूंस ठूंस कर भर दिया जाता है जिससे आये दिन बाल वाहिनियों से मासूम छात्रों व उनके परिवार की जिंदगी तबाह हो रही है।     स्कूल संचालकों के जरा से लालच की वजह से आए दिन स्कूली छात्र दुघर्टना का शिकार होते रहते हैं। पिछले दिनों ऐसी ही लापरवाही की वजह से एक छात्र अपना जीवन गंवा बैठा, जब बाल वाहिनी के नाम पर एक ट्रेवल्स कम्पनी की निजी बस बिना परिचालक के करीब पचास छात्रों को लेकर राजनौता की ओर से गोरधनपुरा चैकी स्थित एक प्राइवेट स्कूल आ रही थी। तभी अचानक ब्रेकर आने से स्कूली छात्र बस से दरवाजे से नीचे जा गिरा जिस पर बालवाहिनी ;बसद्ध का पिछला टायर छात्र के सिर को कुचलता हुआ आगे बढ गया। जिससे उसकी मौत हो गई। ;यहां हमने जानबूझकर स्कूल का नाम नहीं दिया है, क्योंकि यह स्थिति केवल उक्त स्कूल की ही नहीं अपितु कोटपूतली क्षेत्र के लगभग हर स्कूल की है। जहां अभिभावकों एवं बच्चों को वाहन सुविधा के नाम पर ना केवल लूटा जा रहा है बल्कि भंयकर लापरवाही बरतते हुए हादसों को भी न्योता दिया जा रहा है।
    यहां हादसे को टाला जा सकता था, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस तेज गति से लहराती हुए ब्रेकर से कूद गई जिसमें क्षमता से अधिक बच्चे भरे हुए थे। यदि बस में परिचालक होता और बस का दरवाजा बंद होता तो हादसे को टाला जा सकता था लेकिन मामूली रूपयों की बचत ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया।
स्कूल के टैम्पों में बजते है अश्लील फिल्मी गानें- यहां अभिभावकों से न्यूज चक्र का एक गंभीर सवाल है, क्या आपने कभी अपने बच्चे की ‘वाहन सुविधा’ चेक की है? क्या आपने देखा है कि आपके द्वारा भारी फीस दिये जाने के बाद भी आपका बच्चा बालवाहिनी ;टैम्पों या बसद्ध मंे कैसे आता है? उसे सीट मिलती है या घर तक पहुंचाने के लिए उसे किसी तरह भेड़ बकरियों की तरह बस ‘ठूंस ’ लिया जाता है। अगर अभी तक आपने नहीं देखा तो देखें, और साथ ही बच्चे से यह भी पूछें कि क्या स्कूल से घर तक के सफर के दौरान वाहन में किसी तरह के गाने भी बजते हैं।
    यहां हमारे सवांददाता ने देखा है कि कुछेक स्कूली टैम्पों में फूहड़ व अश्लील गाने तक बजते रहते हैं।