दिल्ली में मेडिकल स्टूडेन्ट के साथ हुए गेंगरेप का गुस्सा कोटपूतली के युवा वर्ग में भी देखने को मिला। युवा रेवाॅल्यूशन के नेतृत्व में युवकों ने कैंडल मार्च किया और दोषियों को फांसी की मांग करते हुए देश में महिला एवं लड़कियों की सुरक्षा की मांग की। रेवाॅल्युशन के स्वयं सेवकों ने ‘शीला जी शर्म करो, इन दरिदों को फांसी दो’ के नारे लगाए। सभी स्वयंसेवकों ने कोटपूतली के नगरपालिका पार्क में मोमबत्तियां जलाई एवं पिड़ता के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते ... कहते हैं हाथों की लकीरों पर भरोसा मत कर , किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते। जी हां , इस कथनी को करनी में बदल दिया है राजस्थान की कोटपूतली तहसील के नारेहड़ा गांव की 14 वर्षीय मुखला सैनी ने। मुखला को कुदरत ने जन्म से ही हाथ नहीं दिये , लेकिन मुखला का हौसला , जज्बा और हिम्मत देखिए , उसने ‘ करत-करत अभ्यास के जड़मत होत सुजान ’ कहावत को भी चरितार्थ कर दिखाया है , अब वह अपने पैरों की सहायता से वह सब कार्य करती है जो उसकी उम z के अन्य सामान्य बच्चे करते हैं। कुदरत ने मुखला को सब कुछ तो दिया , लेकिन जीवन के जरूरी काम-काज के लिए दो हाथ नहीं दिये। बिना हाथों के जीवन की कल्पना करना भी बहुत कठिन है , लेकिन मुखला ने इसे अपनी नियति मान कर परिस्थितियों से समझौता कर लिया है। हाथ नहीं होने पर अब वह पैरों से अपने सारे काम करने लग गई है। पढ़ने की ललक के चलते मुखला पैरों से लिखना सीख गई है और आठवीं कक्षा में पहुंच गई है। मुखला को पैरों से लिखते देखकर हाथ वालों को भी कुछ कर दिखाने की प्रेरणा लेनी चाहिए...
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