सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बस जरा सी कसर बाकी है

कुछ तो शर्म करो ऐ दुनिया वालों,


बस जरा सी कसर बाकी है,

अब इस दीये में और तेल नहीं,

बस जरा सी बाती बाकी है।

बुझ ना जाये कहीं ये दीया,

पेड़ो पर कुल्हाड़े चलाने से,

नोटों के बंडल खातिर

बावड़ियों के पेदें सुखाने से

क्यों चला रहे हो हथोड़े पहाड़ों पर,

क्यों सूनी ‘मां’ की छाती है,

क्यों गिरती हैं यहां खड़ी इमारतें,

क्यों पल में ‘सुनामी’ आ जाती है।

कुछ तो शर्म करो ऐ दुनिया वालों

बस जरा सी कसर बाकी है

अब इस दीये में और तेल नहीं

बस जरा सी बाती बाकी है।

क्यों खामोश हैं वो हवायें,

जो कभी खुशियों के राग सुनाती थी,

मिलाती थी ताल से ताल ‘बैसाखी’ पर

रंगों के संग इठलाती थी।

क्यों ठहर गयी वो गंगा,

जो कभी आयी फाड़कर ‘मां’ की छाती थी,

क्यों गौ मुख गया है सूख,

क्यों चिड़िया रेत में नहाती है।

कुछ तो शर्म करो ऐ दुनिया वालों

जल रहा है तेल, घट रही है बाती

बस जरा सी कसर बाकी है

टूट चुकी है धरती माता,

हम आदमजात के प्रहारों से,

छलनी हो गयी मां की छाती,

अब क्या ‘इतिहास’ दोहराना बाकी है।

कुछ तो शर्म करो ऐ दुनिया वालो,

बस जरा सी....कसर..बाकी है।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते

  किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते ... कहते हैं हाथों की लकीरों पर भरोसा मत कर , किस्मत तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते। जी हां , इस कथनी को करनी में बदल दिया है राजस्थान की कोटपूतली तहसील के नारेहड़ा गांव की 14 वर्षीय मुखला सैनी ने। मुखला को कुदरत ने जन्म से ही हाथ नहीं दिये , लेकिन मुखला का हौसला , जज्बा और हिम्मत देखिए , उसने ‘ करत-करत अभ्यास के जड़मत होत सुजान ’ कहावत को भी चरितार्थ कर दिखाया है , अब वह अपने पैरों की सहायता से वह सब कार्य करती है जो उसकी उम z के अन्य सामान्य बच्चे करते हैं। कुदरत ने मुखला को सब कुछ तो दिया , लेकिन जीवन के जरूरी काम-काज के लिए दो हाथ नहीं दिये। बिना हाथों के जीवन की कल्पना करना भी बहुत कठिन है , लेकिन मुखला ने इसे अपनी नियति मान कर परिस्थितियों से समझौता कर लिया है। हाथ नहीं होने पर अब वह पैरों से अपने सारे काम करने लग गई है। पढ़ने की ललक के चलते मुखला पैरों से लिखना सीख गई है और आठवीं कक्षा में पहुंच गई है। मुखला को पैरों से लिखते देखकर हाथ वालों को भी कुछ कर दिखाने की प्रेरणा लेनी चाहिए...

जादुई धरातल पर असली मुलाकात, गzेट मैजिशियन शिव कुमार के साथ

आरा मशीन से कटकर दो टुकड़ों में बंट जाते हैं जादुगर शिवकुमार प्रश्न- शिव कुमार जी, जादू क्या है? इससे किस प्रकार लोगों का स्वस्थ मनोरंजन हो पाता है? जवाब- जादू विज्ञान पर आधारित एक कला है, और इस कला को खूबसूरती के साथ पेश करना ही मैजिक है। इसमें सामाजिक संदेश छिपे होते हैं। लोगों को अंधविश्वास से लड़ने की प्रेरणा देता है जादू। इसलिए इससे स्वस्थ मनोरंजन भी होता है। प्र श्न- अगर जादू एक कला है, विज्ञान है तो फिर जो लोग टोने-टोटके करते हैं, झाड़-फूक करते हैं, वो क्या है? जवाब- यह बिल्कुल गलत और झूठ है कि टोने-टोटकों या झाड़फूंक से किसी को वश में किया जा सकता है। तंत्र-मंत्र जादू-टोना कुछ नहीं होता है। अगर जादू से किसी की जान ली जा सकती या दी जा सकती तो सरकार देश की सीमाओं की रक्षा के लिए एक जादूगर को नियुक्त कर देती और किसी को शहीद होना नहीं पड़ता। ...लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है। जादू से सिर्फ एक स्वस्थ मनोरंजन हो सकता है, ऐसा मनोरंजन जिससे डिप्रेशन का मरीज भी ठीक हो जाता है। प्रश्न- ...तो जादू के शो के माध्यम से आप किस प्रकार के संदेश समाज को देते हैं? जवाब- हम अपने शो में लड़की को गायब क...

लापरवाही का शिकार गांव बनेटी, सभी सुविधाऐं होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं कर पा रहे ग्रामवासी